
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र का आज 12वां दिन है और सदन की कार्यवाही काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं। आज का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु ‘धर्म स्वातंत्र्य (संशोधन) विधेयक’ रहने वाला है, जिसे गृह मंत्री विजय शर्मा सदन के पटल पर रखेंगे। इसके अलावा, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विभागों की अनुदान मांगों पर भी विस्तृत चर्चा होगी। सत्ता पक्ष जहां अपनी उपलब्धियां गिनाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष ने धमतरी-कांकेर में अवैध प्लाटिंग और बिजली व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए पुख्ता रणनीति तैयार कर ली है।
सदन में पेश होगा ‘धर्म स्वातंत्र्य’ संशोधन विधेयक
आज सदन की विधायी कार्यवाही में ‘धर्म स्वातंत्र्य (संशोधन) विधेयक’ का प्रस्तुतीकरण सबसे अहम मोड़ होगा। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा इस विधेयक को पेश करेंगे, जिसका उद्देश्य राज्य में धर्म परिवर्तन से जुड़े कानूनों को और अधिक प्रभावी बनाना बताया जा रहा है। इस विधेयक पर चर्चा के दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच वैचारिक टकराव देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही वित्त मंत्री ओपी चौधरी छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक पेश करेंगे और कई महत्वपूर्ण शासकीय दस्तावेजों को पटल पर रखेंगे।
मुख्यमंत्री साय और मंत्रियों से कड़े सवाल
प्रश्नकाल के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मंत्री टंकराम वर्मा और केदार कश्यप विधायकों के सीधे सवालों का सामना करेंगे। विपक्ष ने धमतरी और कांकेर जिलों में फल-फूल रहे अवैध प्लाटिंग के कारोबार को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। साथ ही, प्रदेश की चरमराती बिजली व्यवस्था और विज्ञापनों पर सरकारी खजाने से हुए भारी खर्च को लेकर भी घेराबंदी की जाएगी। मुख्यमंत्री के विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान विपक्ष कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कसावट पर भी सवाल खड़े करेगा।
ध्यानाकर्षण और याचिकाओं के जरिए गूंजेंगे जनहित के मुद्दे
सदन में आज विधायक कुंवर सिंह निषाद और ललित चंद्राकर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से जनहित के गंभीर विषयों पर सरकार का ध्यान खींचेंगे। वहीं, क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर विधायक विक्रम मंडावी, लता उसेंडी और उद्देश्वरी पैकरा अपनी-अपनी याचिकाओं की प्रस्तुति देंगे। बस्तर से लेकर मैदानी इलाकों की स्थानीय समस्याओं की गूंज आज सदन में सुनाई देगी। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक सहायता योजना और ग्रामोद्योग बोर्ड में कथित गड़बड़ियों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
विपक्ष के तीखे तेवर और हंगामे के आसार
विपक्ष ने पहले ही साफ कर दिया है कि वह जनहित के मुद्दों पर सरकार को आसानी से नहीं छोड़ने वाला है। अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की सुस्त रफ्तार और किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर सदन में तीखी नोकझोंक हो सकती है। राजस्व, वन और आपदा प्रबंधन जैसे विभागों में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्षी सदस्य मंत्रियों को निरुत्तर करने की कोशिश करेंगे। आज की कार्यवाही पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसमें कई ऐसे फैसले होने हैं जो आने वाले समय में राज्य की राजनीति और सामाजिक ढांचे को प्रभावित करेंगे।



