छत्तीसगढ़ में शर्मनाक खेल: मुर्दे का फर्जी डेथ सर्टिफिकेट बनाकर डकारे पैसे, सचिव और पति पर FIR

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने मानवता और सरकारी सिस्टम, दोनों को शर्मसार कर दिया है। ‘मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना’ में सेंधमारी करते हुए जालसाजों ने एक मृत महिला का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र (Fake Death Certificate) तैयार किया और सरकारी खजाने से करीब 1 लाख रुपये की सहायता राशि डकार ली। इस पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि गांव का पंचायत सचिव और मृतका का पति ही निकला। पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जांच के दायरे को बढ़ा दिया है।

मौत की तारीख बदली और ‘साहब’ बन गए हिस्सेदार

इस घोटाले की पटकथा बड़े ही शातिर तरीके से लिखी गई थी। जानकारी के मुताबिक, सुमन बाई पटेल नाम की महिला की वास्तविक मृत्यु 27 नवंबर 2024 को हुई थी। नियमानुसार, इस तारीख के आधार पर वे सहायता योजना के दायरे में नहीं आ रहे थे। पैसा हड़पने के लालच में आरोपियों ने शातिराना चाल चली और महिला की मौत की तारीख बदलकर 2 जून 2025 का फर्जी डेथ सर्टिफिकेट तैयार कर लिया। इसी जाली दस्तावेज के दम पर श्रम विभाग से सहायता राशि स्वीकृत करा ली गई। बिर्रा पुलिस ने अब पंचायत सचिव रोहित पटेल और मृतका के पति अशोक पटेल को इस धोखाधड़ी का मुख्य आरोपी बनाया है।

उपाध्यक्ष की शिकायत पर खुली ‘भ्रष्टाचार की पोल’

इस काले कारनामे का पर्दाफाश तब हुआ जब जिला पंचायत उपाध्यक्ष गगन जयपुरिया को इस गड़बड़ी की भनक लगी। उन्होंने 2 मार्च 2026 को कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से लिखित शिकायत कर मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। एसपी विजय कुमार पाण्डेय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन जांच टीम गठित की। शुरुआती तफ्तीश में ही यह साफ हो गया कि कागजों में हेरफेर कर सरकार को चूना लगाया गया है। प्रशासन की इस सक्रियता के बाद अब जिले के अन्य पंचायतों में भी हड़कंप मचा हुआ है।

श्रम विभाग की लापरवाही: कैसे पास हो गया जाली कागज?

इस प्रकरण ने श्रम विभाग की सत्यापन प्रक्रिया (Verification Process) पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर विभाग के अधिकारियों ने बिना जमीनी हकीकत जाने और बिना दस्तावेजों की बारीकी से जांच किए इतनी बड़ी राशि कैसे स्वीकृत कर दी? फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर पैसे का भुगतान होना यह दर्शाता है कि विभागीय मिलीभगत या फिर भारी लापरवाही इस घोटाले की जड़ में है। अब पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या विभाग के किसी कर्मचारी ने भी इस खेल में अपना हिस्सा लिया था।

बिर्रा पुलिस की रेड: और भी खुलासों की उम्मीद

फिलहाल बिर्रा थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज कर ली है। जांच अधिकारियों का मानना है कि यह केवल एक अकेला मामला नहीं हो सकता। आशंका जताई जा रही है कि पंचायत सचिव ने अन्य हितग्राहियों के नाम पर भी इसी तरह की फर्जी फाइलें तैयार की होंगी। पुलिस अब सचिव के कार्यकाल के दौरान स्वीकृत हुई अन्य सभी फाइलों को खंगालने की तैयारी में है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि गरीबों के हक का पैसा खाने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

पंचायत सचिव फरार, धरपकड़ के लिए छापेमारी

मामला दर्ज होने के बाद से ही आरोपी पंचायत सचिव फरार बताया जा रहा है। पुलिस की टीमें आरोपियों के संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। इधर, जांजगीर-चांपा के जिला प्रशासन ने श्रम विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे अपनी ऑडिट प्रक्रिया को और सख्त करें ताकि भविष्य में ‘मुर्दों के नाम पर’ पैसे निकालने का यह गंदा खेल दोबारा न खेला जा सके। ग्रामीण इलाकों में इस घटना के बाद से ही भारी आक्रोश देखा जा रहा है, लोग दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग कर रहे हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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