
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में आज अजीब नजारा देखने को मिला जब सत्ता पक्ष के विधायकों ने ही स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। स्कूलों के ‘युक्तियुक्तकरण’ यानी स्कूलों को आपस में मिलाने या बंद करने की प्रक्रिया पर भाजपा के दिग्गज विधायकों ने अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा किया। सदन में जब अपनी पार्टी के विधायक हमलावर हुए तो विपक्ष ने भी इस मौके का पूरा फायदा उठाया और सरकार की कार्यप्रणाली पर जमकर चुटकी ली। मंत्री को सफाई देने में काफी मशक्कत करनी पड़ी लेकिन विधायकों के तीखे तेवरों ने शिक्षा विभाग की तैयारियों की पोल खोल दी।
सुनील सोनी का सवाल: स्कूलों की जमीन और भवनों का क्या हुआ?
भाजपा विधायक सुनील सोनी ने रायपुर जिले में स्कूलों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसकी पूरी सूची मांगी। उन्होंने पूछा कि पिछले एक साल में रायपुर संभाग में कितने स्कूलों को बंद किया गया या दूसरी जगह शिफ्ट किया गया है। सोनी का मुख्य जोर इस बात पर था कि जिन स्कूलों को खाली किया गया है उनकी कीमती जमीन और सरकारी भवनों के भविष्य पर सरकार ने क्या फैसला लिया है। उन्होंने आशंका जताई कि बिना योजना के स्कूलों को बंद करने से सरकारी संपत्तियों पर अतिक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
अजय चंद्राकर और राजेश मूणत के तीखे सवाल
विधायक अजय चंद्राकर ने शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि जब स्कूलों में मास्टर नहीं हैं तो सरकार प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर काम कर रहे शिक्षकों को वापस क्यों नहीं बुला रही है। उन्होंने साफ शब्दों में पूछा कि क्या सरकार इन शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति खत्म कर उन्हें मूल स्कूलों में भेजने पर विचार कर रही है? वहीं रायपुर पश्चिम के विधायक राजेश मूणत ने राजधानी के स्कूलों की जर्जर हालत का जिक्र करते हुए कहा कि युक्तियुक्तकरण के बाद कई जगह छात्रों के बैठने तक की जगह नहीं बची है। उन्होंने मंत्री से पूछा कि क्या कागजों पर सुधार दिखाने के चक्कर में बच्चों की बुनियादी सुविधाओं से समझौता किया जा रहा है?
मंत्री गजेंद्र यादव का जवाब: 10 हजार से ज्यादा स्कूलों में बदलाव
चौतरफा हमलों के बीच स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने सदन को जानकारी दी कि पूरे प्रदेश में अब तक कुल 10 हजार 583 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण किया गया है। उन्होंने बताया कि रायपुर जिले में ही 389 स्कूलों में यह प्रक्रिया अपनाई गई है जिनमें से वर्तमान में चार स्कूल पूरी तरह खाली हो चुके हैं। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि युक्तियुक्तकरण के बाद खाली हुए करीब 166 स्कूलों की परिसंपत्तियों का उपयोग अन्य सरकारी कार्यों के लिए करने की नई योजना बनाई जा रही है। उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि 30 मार्च से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली जाएंगी।
विपक्ष की चुटकी: “जब अपने ही अपनों को घेर रहे हों”
सत्ता पक्ष के भीतर मचे इस घमासान को देखकर कांग्रेस विधायकों ने भी सदन में मजे लिए। विपक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि जब भाजपा के वरिष्ठ विधायक ही शिक्षा मंत्री के जवाबों से संतुष्ट नहीं हैं तो जनता क्या उम्मीद रखेगी। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि युक्तियुक्तकरण के नाम पर असल में शिक्षा व्यवस्था को सिकोड़ा जा रहा है जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को परेशानी हो रही है। विपक्षी सदस्यों ने कहा कि भाजपा सरकार के भीतर ही तालमेल की कमी साफ नजर आ रही है जो प्रदेश के विकास के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
30 मार्च की डेडलाइन और भविष्य की रणनीति
राजेश मूणत और अन्य विधायकों की नाराजगी को देखते हुए मंत्री गजेंद्र यादव ने आश्वासन दिया कि स्कूलों में बैठने की व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को लेकर जो भी कमियां हैं उन्हें 30 मार्च तक हर हाल में सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद स्कूलों को बंद करना नहीं बल्कि उन्हें व्यवस्थित और मजबूत बनाना है। हालांकि विधायकों के तेवरों से यह साफ हो गया कि शिक्षा विभाग को अब केवल आंकड़ों से काम नहीं चलाना होगा बल्कि जमीनी स्तर पर सुधार करके दिखाना होगा।



