
CG Legislative Assembly Session 2026: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र का आज 14वां दिन है। आज सदन की कार्यवाही काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं क्योंकि विपक्ष ने स्वास्थ्य और गृह विभाग से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है। प्रश्नकाल के दौरान गृह मंत्री विजय शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब विधायकों के तीखे सवालों का जवाब देंगे। आज के सत्र में नकली दवाओं की सप्लाई, अस्पतालों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और जेलों में महिला कैदियों के साथ रह रहे मासूम बच्चों के भविष्य जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा होगी।
सरकारी अस्पतालों में ‘अमानक’ दवाओं का खेल?
विधायक देवेंद्र यादव और सुशांत शुक्ला ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर बड़े सवाल उठाए हैं। विधायक देवेंद्र यादव ने पिछले पांच सालों में एकत्र किए गए दवाओं के नमूनों और उनमें से फेल हुए (Not of Standard Quality) सैंपल्स की जानकारी मांगी है। वहीं सुशांत शुक्ला ने सीजीएमएससी (CGMSC) द्वारा की गई करोड़ों की खरीदी और खराब गुणवत्ता के कारण उपयोग से रोकी गई दवाओं पर सरकार से जवाब मांगा है। विपक्ष का आरोप है कि अमानक दवाओं की आपूर्ति से मरीजों की जान जोखिम में डाली जा रही है।
जेल की कालकोठरी में बच्चों का बचपन
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने एक बेहद भावुक और गंभीर मुद्दा सदन में उठाया है। उन्होंने पूछा है कि छत्तीसगढ़ की जेलों में महिला कैदियों के साथ उनके कितने बच्चे रह रहे हैं और उनके पालन-पोषण के लिए क्या नियम हैं। चंद्राकर ने पिछले 5 सालों में जेल के भीतर हुई बच्चों या माताओं की मौत के कारणों और उनकी जांच रिपोर्ट पर भी सवाल किया है। सरकार से पूछा गया है कि इन बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास के लिए विशेषज्ञों की राय ली गई है या नहीं और उनके भविष्य के लिए शासन के पास क्या ठोस कार्ययोजना है।
भिलाई के स्पर्श हॉस्पिटल में ‘अवैध’ ऑक्सीजन प्लांट
वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने भिलाई के स्पर्श हॉस्पिटल में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का मामला उठाया है। आरोप है कि अस्पताल के बेसमेंट में अवैध रूप से ऑक्सीजन प्लांट और भारी मात्रा में सिलेंडर रखे गए हैं जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकते हैं। विधायक ने पूछा है कि क्या औषधि विभाग ने इस प्लांट से निकलने वाली ऑक्सीजन को मरीजों के लिए सुरक्षित घोषित किया है। बेसमेंट में ज्वलनशील गैसों का भंडारण सुरक्षा नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाता है जिस पर स्वास्थ्य मंत्री आज अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे।
पुलिस पदक विजेताओं की सम्मान राशि पर सवाल
विधायक रामकुमार टोप्पो ने छत्तीसगढ़ पुलिस और सशस्त्र बल के जवानों को मिलने वाले वीरता पदकों और उनके सम्मान में दी जाने वाली राशि का मुद्दा उठाया है। उन्होंने पूछा कि क्या वीरता पदक प्राप्त करने वाले जवानों और अधिकारियों को राज्य सरकार की ओर से कोई विशेष सम्मान राशि दी जाती है। टोप्पो ने साल 2024 से जनवरी 2026 तक वीरता पदक पाने वाले अधिकारियों और जवानों की सूची भी मांगी है। इस सवाल के जरिए जवानों के मनोबल और उनके प्रति सरकार के नजरिए को परखने की कोशिश की जाएगी।
15वें वित्त की राशि और पंचायतों का बजट
विधायक श्रीमती चातुरी नंद ने राज्य की ग्राम पंचायतों को मिलने वाली मूलभूत और 15वें वित्त की राशि पर सवाल किया है। उन्होंने फरवरी 2026 तक जारी की गई राशि का जिलावार ब्यौरा मांगा है। सवाल यह भी उठाया गया है कि क्या साल 2024-25 में पंचायतों को भुगतान करने में देरी हुई है और अगर ऐसा हुआ है तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी कौन हैं। पंचायतों के विकास कार्यों के लिए मिलने वाली राशि में देरी से ग्रामीण इलाकों में चल रही योजनाएं प्रभावित हो रही हैं जिस पर सदन में तीखी बहस हो सकती है।
आयुष्मान कार्ड प्रोत्साहन राशि में ‘घोटाला’
बालोद जिले के अर्जुंदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयुष्मान कार्ड के तहत होने वाले इलाज में मिलने वाली प्रोत्साहन राशि में गड़बड़ी की शिकायत सामने आई है। विधायक कुंवर सिंह निषाद ने पूछा है कि साल 2025-26 के दौरान इस राशि के वितरण में हुई अनियमितता में कौन-कौन से अधिकारी और कर्मचारी शामिल पाए गए हैं। भ्रष्टाचार के इस मामले में सरकार ने अब तक क्या कार्रवाई की है और दोषियों के पदनाम सहित जानकारी मांगी गई है।
विधानसभा की कार्यवाही और जनहित के मुद्दे
आज के सत्र में ध्यानाकर्षण प्रस्तावों और याचिकाओं के जरिए प्रदेश की कानून व्यवस्था और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली पर भी चर्चा होगी। गृह मंत्री विजय शर्मा जहां पुलिस और पंचायतों से जुड़े जवाब देंगे वहीं स्वास्थ्य मंत्री को दवाओं की गुणवत्ता और निजी अस्पतालों की मनमानी पर सफाई देनी होगी। सत्र के दौरान कुछ महत्वपूर्ण संशोधन विधेयकों पर भी चर्चा होने की संभावना है। जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार इन गंभीर आरोपों पर कोई ठोस जांच कमेटी गठित करने का आश्वासन देती है।



