
छत्तीसगढ़ विधानसभा में पेश हुए नए धर्मांतरण विरोधी विधेयक धर्म स्वातंत्र्य विधेयक- 2026 को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने इस प्रस्तावित कानून का पुरजोर विरोध करते हुए राजधानी रायपुर के लोक भवन में प्रदर्शन किया। जोगी ने न केवल राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा, बल्कि विरोध स्वरूप विधेयक की प्रति भी जला दी। उन्होंने साय सरकार पर आरोप लगाया कि यह कानून आम नागरिक की धार्मिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों का सीधा हनन है।
विधानसभा के आखिरी दिन विधेयक क्यों? जोगी ने उठाए सवाल
अमित जोगी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि विधानसभा का बजट सत्र पिछले एक महीने से चल रहा था। अगर सरकार वाकई इस कानून पर गंभीर थी, तो इसे सत्र के शुरुआती दिनों में लाना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्र के अंतिम दिनों में आनन-फानन में विधेयक लाना सरकार की घबराहट और डर को दर्शाता है। जोगी के मुताबिक, इतनी जल्दीबाजी में बिल पेश करने से विधायकों को इस पर गहराई से अध्ययन करने और सार्थक चर्चा करने का मौका ही नहीं मिल पाया।

सेवा, शिक्षा और स्वास्थ्य अब ‘प्रलोभन’ के दायरे में?
विधेयक की बारीकियों पर आपत्ति जताते हुए अमित जोगी ने कहा कि इसमें ‘प्रलोभन’ शब्द की परिभाषा को इतना बड़ा कर दिया गया है कि अब जनसेवा भी अपराध की श्रेणी में आ सकती है। उन्होंने तर्क दिया कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं देना भी अब धर्मांतरण के लिए लालच माना जा सकता है। जोगी का कहना है कि यह कानून विशेष रूप से अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लोगों के अधिकारों को प्रभावित करेगा, क्योंकि उन तक पहुंचने वाली मदद को अब शक की निगाह से देखा जाएगा।
‘द्वारपाल’ बनेंगे कलेक्टर: जोगी ने बताया संवैधानिक उल्लंघन
जेसीसीजे अध्यक्ष ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि अब किसी भी व्यक्ति को अपने धर्म से जुड़े कार्यों या धर्म परिवर्तन के लिए प्रशासन से अनुमति लेनी होगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने जिला कलेक्टर को धर्म का “द्वारपाल” बना दिया है। जोगी के अनुसार, किसी भी नागरिक को अपनी आस्था के लिए सरकारी दफ्तर के चक्कर काटना संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लंघन है, जो हर व्यक्ति को अपने धर्म को मानने और प्रचार करने की आजादी देता है।
सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित, फिर इतनी जल्दबाजी क्यों?
अमित जोगी ने याद दिलाया कि इस तरह के कानून देश के करीब 12 अन्य राज्यों में भी लाए गए हैं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। उन्होंने कहा कि जब देश की सबसे बड़ी अदालत में इस विषय पर सुनवाई जारी है और मामला विचाराधीन है, तो विष्णु देव साय सरकार को ऐसी क्या जल्दी थी कि वे इसे तुरंत लागू करना चाहते हैं। उन्होंने इसे न्यायिक प्रक्रिया की अनदेखी बताते हुए सरकार से संयम बरतने की अपील की।
राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग: अनुच्छेद 200 का दिया हवाला
ज्ञापन सौंपते समय अमित जोगी ने राज्यपाल से अपील की कि वे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 200 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करें। उन्होंने मांग की कि इस विधेयक को मंजूरी देने के बजाय पुनर्विचार के लिए वापस विधानसभा भेजा जाए। जोगी ने चेतावनी दी कि यदि यह कानून लागू होता है, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे और भाजपा को सड़क से लेकर अदालत और आने वाले चुनावों में जनता के गुस्से का सामना करना पड़ेगा।
विरोध की आग: बिल की प्रति जलाकर जताया आक्रोश
प्रदर्शन के अंत में अमित जोगी ने प्रतीकात्मक रूप से धर्मांतरण विधेयक की प्रति जलाकर अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने साफ कर दिया कि उनकी पार्टी इस कानून को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी। जोगी के इस कदम से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की राजनीति में धर्मांतरण का मुद्दा और भी गरमाने वाला है। विपक्ष अब इस मामले को जनता के बीच ले जाने की योजना बना रहा है।



