
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में गरीबों के आशियाने और मजदूरी के हक पर डाका डालने का एक गंभीर मामला सामने आया है। जनपद पंचायत शंकरगढ़ के ग्राम पंचायत हरिगवां में प्रधानमंत्री आवास योजना और मनरेगा के फंड में करीब 10 लाख रुपये की वित्तीय हेराफेरी पकड़ी गई है। जिला प्रशासन की जांच में भ्रष्टाचार की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने पंचायत सचिव जॉन कुमार टोप्पो और ग्राम रोजगार सहायक संजय दास को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। इस कार्रवाई से जिले के पंचायत महकमे में हड़कंप मच गया है।
जियो टैगिंग का खेल: अधूरे मकानों को कागजों पर बताया पूरा
भ्रष्टाचार के इस खेल में तकनीक का सहारा लेकर सरकार को चूना लगाया गया। शंकरगढ़ सीईओ वेदप्रकाश पांडे के मुताबिक आरोपियों ने उन मकानों की फर्जी जियो टैगिंग (Geo-Tagging) की जो या तो अभी आधे बने थे या जिनका काम शुरू ही नहीं हुआ था। कागजों पर इन मकानों को ‘पूर्ण’ दिखाकर किस्तों की राशि जारी करवाई गई। इसके बाद आरोपियों ने भोले-भाले ग्रामीणों के अंगूठे लगवाकर और ओटीपी लेकर उनके खातों से पैसे निकलवा लिए और आपस में बांट लिए। जांच में पता चला कि 47 मकान अभी भी निर्माणाधीन हैं लेकिन उनकी पूरी रकम डकार ली गई है।
फर्जी मास्टर रोल और मजदूरी का पैसा भी डकारा
आरोपियों ने सिर्फ पीएम आवास ही नहीं बल्कि मनरेगा (MGNREGA) के फंड में भी हाथ साफ किया। ग्राम पंचायत हरिगवां में मजदूरों के नाम पर फर्जी मास्टर रोल तैयार किए गए। जिन लोगों ने कभी काम ही नहीं किया उनके नाम पर हाजिरी भरी गई और मजदूरी का भुगतान निकाल लिया गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना के 7 हितग्राहियों के हिस्से के 9 लाख 5 हजार रुपये और मनरेगा के 1 लाख 881 रुपये का गबन किया गया। कुल मिलाकर 10 लाख 5 हजार 881 रुपये की सरकारी राशि की बंदरबांट की गई।
एक ही शख्स को कई नामों से बांटे आवास: जांच में चौंकाने वाला खुलासा
भ्रष्टाचार की हद तो तब हो गई जब जांच टीम को पता चला कि एक ही व्यक्ति को अलग-अलग नामों से कई आवास स्वीकृत कर दिए गए थे। यह सब इसलिए किया गया ताकि ज्यादा से ज्यादा पैसा निकाला जा सके। कुछ मामलों में तो हितग्राहियों को पता ही नहीं था कि उनके नाम पर मकान स्वीकृत हुआ है और पैसा भी निकल चुका है। आरोपियों ने सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया।
कलेक्टर की सख्त चेतावनी: भ्रष्टाचार करने वालों की खैर नहीं
बलरामपुर कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए साफ किया है कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गरीबों के हक का पैसा खाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। जिला प्रशासन अब जिले की अन्य पंचायतों में भी पीएम आवास और मनरेगा के कार्यों का ऑडिट करा रहा है ताकि ऐसे अन्य घोटालों को उजागर किया जा सके। कलेक्टर ने ग्रामीणों से भी अपील की है कि वे अपना ओटीपी या बैंक विवरण किसी अज्ञात व्यक्ति को न दें।
पुलिसिया कार्रवाई और आगे की जांच
पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि क्या इस गबन में जनपद स्तर के किसी बड़े अधिकारी या बैंक कर्मचारियों की भी मिलीभगत है। आरोपियों के बैंक खातों और संपत्ति की भी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि गबन की गई राशि की वसूली की जा सके। फिलहाल सचिव और रोजगार सहायक के जेल जाने के बाद ग्राम पंचायत हरिगवां में विकास कार्यों की जिम्मेदारी दूसरे कर्मचारियों को सौंपी गई है। इस कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि ग्रामीण विकास की योजनाओं में सेंधमारी अब महंगी पड़ेगी।



