
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में कस्टम मिलिंग के काम में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के निर्देश पर खाद्य विभाग की टीम ने श्यामतराई स्थित ऋषभ राइस प्रोसेसिंग मिल में दबिश दी। जांच के दौरान वहां सरकारी धान और चावल के स्टॉक में भारी अंतर पाया गया। मिल संचालक विनय पारख पर आरोप है कि उन्होंने शासन से अनुबंध के मुताबिक समय पर चावल जमा नहीं कराया और सरकारी कार्य में रुचि नहीं दिखाई। इस गंभीर लापरवाही के बाद मिलर के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
5 हजार क्विंटल से ज्यादा चावल बकाया: मिलर ने नहीं दिखाई रुचि
खाद्य विभाग की जांच में सामने आया कि ऋषभ राइस प्रोसेसिंग ने खरीफ वर्ष 2024-25 के लिए 64 हजार क्विंटल धान का अनुबंध किया था। इसमें से मिलर ने 38,631 क्विंटल धान का उठाव कर लिया, जिसका अनुपातिक 26,129 क्विंटल चावल बनता था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि मिलर ने नागरिक आपूर्ति निगम और एफसीआई में 5,262 क्विंटल चावल अब तक जमा ही नहीं कराया। इसके बावजूद मिलर ने नए सत्र 2025-26 के लिए भी करीब 96 हजार क्विंटल धान के उठाव की अनुमति ले ली और काम को बीच में ही लटकाए रखा।
भौतिक सत्यापन में खुला राज: दूसरे मिल के बारदाने में मिला चावल
सहायक खाद्य अधिकारी और निरीक्षकों की टीम ने जब मिल के भीतर रखे स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया, तो वहां कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। मिल में सरकारी रिकॉर्ड से 257 क्विंटल चावल ज्यादा पाया गया। सबसे बड़ी गड़बड़ी तब पकड़ी गई जब 250 क्विंटल चावल ‘प्रिशा इंटरप्राइजेज कुकरेल’ के मार्का वाले बारदाने में मिला। यह नियम के विरुद्ध है कि एक मिल में दूसरी मिल के बारदाने का उपयोग किया जाए। जांच के दौरान संचालक बी-1 रजिस्टर और मासिक विवरणी जैसे जरूरी दस्तावेज भी पेश नहीं कर सके।
कानून का उल्लंघन: आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दर्ज हुआ प्रकरण
प्रशासन ने मिलर की इन हरकतों को छत्तीसगढ़ कस्टम मिलिंग चावल उपार्जन आदेश 2016 की विभिन्न कंडिकाओं का स्पष्ट उल्लंघन माना है। निर्धारित समय में चावल जमा न करना, धान का उठाव कर उसे निजी लाभ के लिए रोकना और स्टॉक का मिलान न होना ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955’ की धारा 3/7 के तहत अपराध है। इन्हीं धाराओं के आधार पर खाद्य विभाग ने ऋषभ राइस प्रोसेसिंग के खिलाफ केस दर्ज किया है। कलेक्टर ने साफ किया है कि सरकारी संपत्ति के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा।
जिले के राइस मिलरों को सख्त हिदायत: प्राथमिकता पर हो मिलिंग
धमतरी जिला प्रशासन अब उन सभी राइस मिलों की लिस्ट तैयार कर रहा है जिन्होंने धान का उठाव तो कर लिया है, लेकिन चावल वापस करने में आनाकानी कर रहे हैं। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने सभी पंजीकृत मिलरों को चेतावनी दी है कि कस्टम मिलिंग का काम उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए। जिले में धान के उठाव और समय पर चावल जमा करने की प्रक्रिया की अब रोजाना मॉनिटरिंग की जा रही है। जो मिलर शासन के साथ हुए अनुबंध की शर्तों को तोड़ेंगे, उन्हें ब्लैकलिस्ट करने के साथ-साथ उनके खिलाफ कानूनी शिकंजा भी कसा जाएगा।
पारदर्शिता के लिए नियमित जांच अभियान जारी
धमतरी जिले में पिछले कुछ दिनों से खाद्य विभाग की टीमें सक्रिय हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि किसानों से खरीदे गए एक-एक दाने का सही हिसाब रहे और राशन वितरण प्रणाली के लिए समय पर चावल उपलब्ध हो सके। ऋषभ राइस मिल पर हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद अन्य राइस मिलरों में भी हड़कंप का माहौल है। विभाग का कहना है कि यह अभियान रुकने वाला नहीं है और आने वाले दिनों में कई और मिलों का औचक निरीक्षण किया जाएगा ताकि पूरी प्रणाली में पारदर्शिता बनी रहे।



