
CG Congress PM Awas List Controversy: छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। गरियाबंद जिले के देवभोग इलाके में एक कमार आदिवासी परिवार द्वारा आवास की गुहार लगाते हुए जिला पंचायत सीईओ के पैरों में गिरने की घटना ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार के 18 लाख आवास देने के दावे पूरी तरह खोखले हैं और जमीनी हकीकत गरियाबंद की इस घटना से साफ झलक रही है।
कमार परिवार की बेबसी पर कांग्रेस का कड़ा ऐतराज
Pradhan Mantri Awas Yojana: प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि कमार जनजाति प्रदेश की विशेष संरक्षित जनजातियों में आती है। नियमतः इन परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ सबसे पहले मिलना चाहिए। इसके बावजूद यदि एक कमार परिवार को छत के लिए अधिकारियों के सामने दंडवत होना पड़ रहा है, तो यह सिस्टम की नाकामी है। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि जिस राज्य के मुख्यमंत्री स्वयं आदिवासी हों, वहां विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों का यह हाल होना सरकार के लिए डूब मरने वाली बात है।
18 लाख आवास के दावे पर श्वेत पत्र की मांग
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार केवल होर्डिंग्स और विज्ञापनों के जरिए अपनी पीठ थपथपा रही है। पार्टी ने मांग की है कि सरकार 18 लाख आवास के अपने दावे पर ‘श्वेत पत्र’ जारी करे। कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि आखिर ये घर कहां बने हैं और किन लोगों को मिले हैं। सुशील आनंद शुक्ला ने सरकार को चुनौती दी कि अगर उनके आंकड़े सही हैं, तो लाभार्थियों की नामवार सूची सार्वजनिक की जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
पुरानी किश्तों और नए आवंटन पर उठ रहे सवाल
विपक्ष का दावा है कि वर्तमान सरकार जिन आवासों को अपनी उपलब्धि बता रही है, उनमें से अधिकांश पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय स्वीकृत हुए थे। कांग्रेस के अनुसार, भूपेश बघेल सरकार के दौरान ही हजारों हितग्राहियों के खातों में पहली किश्त भेज दी गई थी। भाजपा पर आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने कहा कि नई सरकार बनने के बाद से न तो नए आवासों को मंजूरी दी जा रही है और न ही पुराने अधूरे घरों के लिए अगली किश्त जारी हो रही है। इससे गरीब तबके के लोग बीच अधर में लटके हुए हैं।
‘मोदी की गारंटी’ को चुनावी वादा बताकर पल्ला झाड़ने का आरोप
कांग्रेस ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान ‘मोदी की गारंटी’ के नाम पर गरीबों को पक्का मकान देने का बड़ा वादा किया गया था। लेकिन सत्ता में आने के बाद सरकार इन वादों को ठंडे बस्ते में डाल चुकी है। पार्टी के मुताबिक, गरियाबंद की घटना यह साबित करती है कि प्रशासनिक अधिकारी आम जनता की सुनने के बजाय उन्हें अपने दफ्तरों के चक्कर लगवा रहे हैं। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही पात्र लोगों को आवास नहीं मिले, तो वे प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन करेंगे।
विज्ञापनों की चमक और जमीन के अंधेरे का फर्क
पार्टी ने साफ किया कि सरकार को जुमलेबाजी छोड़कर धरातल पर काम करना चाहिए। गरियाबंद जिले के देवभोग की घटना कोई पहली नहीं है, बल्कि प्रदेश के कई सुदूर इलाकों से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं। कांग्रेस का कहना है कि आदिवासी मुख्यमंत्री के दौर में आदिवासियों का ही अपमान हो रहा है। प्रशासन की संवेदनहीनता इस कदर बढ़ गई है कि गरीब को अपने हक के लिए पैरों में गिरना पड़ रहा है। अब देखना होगा कि कांग्रेस के इन तीखे सवालों और सूची सार्वजनिक करने की मांग पर सरकार क्या सफाई पेश करती है।



