
Charandas Mahant Statement Rambhadracharya: छत्तीसगढ़ की राजनीति में इस वक्त देश के बड़े कथावाचकों और संतों को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चरणदास महंत ने एक बेहद तल्ख बयान दिया है जिससे पूरे प्रदेश का सियासी पारा चढ़ गया है। सोमवार को मनेन्द्रगढ़ पहुंचे चरणदास महंत ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य और बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वे इस तरह के बाबाओं को बिल्कुल नहीं मानते और न ही उनके दरबारों में विश्वास रखते हैं। इस बयान के सामने आने के बाद रायपुर से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
रामभद्राचार्य की कथा में जाने से महंत का साफ इनकार, राजनीतिक एजेंडा चलाने का लगाया आरोप
दरअसल इन दिनों चिरमिरी में जगद्गुरु रामभद्राचार्य की भव्य श्रीराम कथा का आयोजन किया जा रहा है। 17 मई से शुरू हुई यह कथा 26 मई तक चलेगी, जिसमें शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल समेत भाजपा के कई दिग्गज नेता पहुंच चुके हैं। जब मनेन्द्रगढ़ में मीडिया कर्मियों ने चरणदास महंत से इस कथा में शामिल होने को लेकर सवाल पूछा, तो वे भड़क गए। महंत ने कहा कि वे रामभद्राचार्य को जगद्गुरु स्वीकार नहीं करते। उनके मुताबिक इन कथावाचकों की बातें धार्मिक कम और राजनीतिक ज्यादा होती हैं, जिससे यह साफ झलकता है कि ये लोग केवल सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रचारक के रूप में काम कर रहे हैं।
बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री पर भी दागे तीखे सवाल, बाबाओं को बताया फर्जी
चरणदास महंत का गुस्सा सिर्फ रामभद्राचार्य तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का नाम लेते हुए उन पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। महंत ने कहा कि देश में इस वक्त धीरेंद्र शास्त्री जैसे जितने भी बाबा घूम रहे हैं, वे सब फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्म और आध्यात्मिक ज्ञान की आड़ में आम जनता को गुमराह किया जा रहा है और आस्था के नाम पर लोगों को ठगने का एक बड़ा कारोबार चल रहा है।
कांग्रेस नेताओं को दी नसीहत, ऐसे आयोजनों और दरबारों से पूरी तरह दूरी बनाने की अपील
कथावाचकों पर हमला बोलने के साथ ही नेता प्रतिपक्ष ने अपनी ही पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ा निर्देश जारी कर दिया है। चरणदास महंत ने सार्वजनिक रूप से कांग्रेस के सभी छोटे-बड़े नेताओं से अपील की है कि वे इस तरह के बाबाओं के कार्यक्रमों, प्रवचनों और दरबारों से पूरी तरह दूरी बना लें। उन्होंने कहा कि कांग्रेसियों को अपने राजनीतिक या व्यक्तिगत जीवन में ऐसे आयोजनों को बढ़ावा देने की कोई आवश्यकता नहीं है, जहां धर्म का इस्तेमाल किसी खास विचारधारा के लाभ के लिए किया जा रहा हो।
हमारे कण-कण में राम बसे हैं, आस्था दिखाने के लिए किसी के दरबार की जरूरत नहीं
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए चरणदास महंत ने कांग्रेस के पारंपरिक सनातनी होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि असली सनातनी तो कांग्रेस के लोग हैं, जो बिना किसी दिखावे के हर जीव और सृष्टि के कण-कण में भगवान राम का वास मानते हैं। उन्होंने गर्व से कहा कि हमें ईश्वर के प्रति अपनी अटूट आस्था और भक्ति साबित करने के लिए किसी भी ढोंगी बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने या उनके सामने झुकने की रत्ती भर भी जरूरत नहीं है।
भाजपा के पलटवार की तैयारी, छत्तीसगढ़ के चौक-चौराहों पर छिड़ी नई वैचारिक जंग
चरणदास महंत के इस तीखे और बेबाक बयान के बाद छत्तीसगढ़ की जमीनी राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। मनेन्द्रगढ़ और चिरमिरी समेत राज्य के तमाम चौक-चौराहों पर इस बयान को लेकर आम लोगों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। भाजपा के स्थानीय और प्रदेश स्तरीय नेताओं की तरफ से भी इस बयान पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में भाजपा इस मुद्दे को संतों के अपमान और सनातन विरोध से जोड़कर कांग्रेस के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा खोल सकती है।



