
Magarlod Child Marriage Stopped: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए एक बाल विवाह को ऐन वक्त पर रोक दिया है. मगरलोड ब्लॉक के एक ग्रामीण इलाके में शादी की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं और महज छह दिन बाद बारात निकलने वाली थी. हालांकि दूल्हे की उम्र कानूनी रूप से तय मापदंड से कम होने के कारण महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर विवाह रुकवा दिया. इसके बाद दोनों पक्षों के परिवारों को कानून की समझाइश दी गई. अब यह शादी लड़के के बालिग होने यानी दो साल बाद संपन्न कराई जाएगी.
मोबाइल पर मिली थी बाल विवाह की गुप्त सूचना, ऐन वक्त पर गांव पहुंची पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम
धमतरी जिला महिला एवं बाल विकास विभाग के संरक्षण अधिकारी यशवंत बैस ने बताया कि 16 जून 2026 को उनके विभाग को मोबाइल के जरिए मगरलोड ब्लॉक के एक गांव में कम उम्र में शादी कराए जाने की गोपनीय जानकारी मिली थी. सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और विभाग की एक संयुक्त टीम तुरंत हरकत में आई और बताए गए पते पर छापेमारी की. जब टीम वहां पहुंची तो घर में शादी का माहौल था, टेंट लग चुके थे और रिश्तेदारों की मौजूदगी में विवाह की रस्में शुरू होने ही वाली थीं.
जांच में लड़की पाई गई बालिग पर दूल्हा निकला 21 साल से छोटा, बांटे जा चुके थे शादी के कार्ड
प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर दूल्हे के शैक्षणिक और व्यक्तिगत दस्तावेजों की जांच शुरू की. स्कूल की अंकसूची और पहचान पत्र की जांच करने पर पता चला कि लड़के की उम्र अभी केवल 19 साल है, जबकि शादी के लिए कानूनी तौर पर लड़के की उम्र 21 साल पूरी होना अनिवार्य है. इसके बाद टीम ने पास के ही एक गांव में रहने वाली दुल्हन के दस्तावेजों की भी तस्दीक की. जांच में लड़की की उम्र 18 साल 5 महीने पाई गई, जिससे यह साफ हो गया कि लड़की तो बालिग है लेकिन लड़का अभी नाबालिग है. शादी के कार्ड भी बांटे जा चुके थे और 23 जून को बारात जानी थी.
समझाइश के बाद परिजनों ने भरा लिखित शपथ पत्र, अब 2 साल बाद कानूनी उम्र में होगी दोनों की शादी
लड़के के नाबालिग होने की पुष्टि होते ही अधिकारियों ने दोनों पक्षों के माता-पिता और वरिष्ठ परिजनों को बुलाकर बाल विवाह विरोधी कानून की जानकारी दी. प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कम उम्र में शादी करना और कराना दोनों ही गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है. अधिकारियों की समझाइश और कानूनी कार्रवाई के डर के बाद दोनों ही परिवार अपनी गलती मानने को तैयार हो गए. प्रशासन ने परिजनों से एक लिखित शपथ पत्र भरवाया है, जिसके तहत उन्होंने संकल्प लिया है कि वे अब ठीक दो साल बाद यानी लड़के की उम्र 21 साल पूरी होने पर ही यह विवाह करेंगे.
बाल विवाह कराने पर मिल सकती है 2 साल की जेल, शादी कराने वाले पंडित और शामिल मेहमानों पर भी होगी कार्रवाई
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों के तहत कम उम्र में विवाह रचाने पर बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाती है. इस कानून के उल्लंघन पर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों को 2 साल तक की सश्रम जेल की सजा और भारी जुर्माने भुगतने का प्रावधान है. इसके साथ ही यह कानून केवल माता-पिता तक सीमित नहीं है, बल्कि बाल विवाह में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले किसी भी व्यक्ति, शादी कराने वाले पंडित या मौलवी, और विवाह समारोह में शामिल होने वाले मेहमानों और रिश्तेदारों के खिलाफ भी समान रूप से मुकदमा दर्ज किया जा सकता है.
धमतरी जिले की 316 ग्राम पंचायतें हो चुकी हैं बाल विवाह मुक्त, सभी 370 पंचायतों को कवर करने का लक्ष्य
धमतरी जिले को पूरी तरह से बाल विवाह के कलंक से मुक्त कराने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. इस मुहिम के तहत जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों से बाल विवाह न होने देने का लिखित प्रस्ताव मांगा गया है. स्थानीय ग्राम सभाओं में इस आशय का प्रस्ताव पारित कर विभाग को भेजा जा रहा है. अब तक जिले की कुल 370 ग्राम पंचायतों में से 316 पंचायतों को पूरी तरह से बाल विवाह मुक्त घोषित किया जा चुका है. अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही बची हुई सभी पंचायतों को भी इस दायरे में शामिल कर लिया जाएगा. इस कार्रवाई के दौरान विधिक सह परिवीक्षा अधिकारी प्रमोद अमृत, चाइल्ड लाइन से अनुराग खलखो, स्थानीय सुपरवाइजर और मगरलोड थाने के सहायक पुलिस उपनिरीक्षक समेत पुलिस बल मौजूद रहा.



