Mahasamund Fake Paneer Raid: सावधान! कहीं आप नकली पनीर तो नहीं खा रहे, महासमुंद में 3 एकड़ में फैली फैक्ट्री में मिला हजारों किलो एनालॉग पनीर, मध्य प्रदेश और ओडिशा तक फैला था नेटवर्क

Mahasamund Fake Paneer Raid: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में मिलावटी और नकली खाद्य पदार्थों के खिलाफ प्रशासनिक टीम ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। महासमुंद कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों पर गठित विशेष टीम ने भलेसर रोड स्थित वैद्या फूड प्रोडक्ट्स फैक्ट्री पर दबिश दी। करीब तीन एकड़ क्षेत्र में फैली इस फैक्ट्री में बड़े पैमाने पर सिंथेटिक यानी एनालॉग पनीर बनाए जाने का खुलासा हुआ है। प्रशासनिक अफसरों ने मौके से बड़ी मात्रा में तैयार माल जब्त करते हुए पूरे परिसर को सील कर दिया है।

एडीएम की अगुवाई में हुई गोपनीय छापेमारी, किसी को नहीं लगी भनक

Mahasamund News: महासमुंद जिला प्रशासन ने इस कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखा। अपर कलेक्टर (एडीएम) के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस बल की संयुक्त टीम ने अचानक भलेसर रोड स्थित वैद्या फूड प्रोडक्ट्स परिसर को चारों तरफ से घेर लिया। अचानक हुई इस कार्रवाई से फैक्ट्री प्रबंधन और वहां काम कर रहे कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने तुरंत उत्पादन इकाइयों और भंडारण कक्षों का निरीक्षण शुरू कर दिया।

मौके पर मिला हजारों किलो तैयार माल, मिलावट की आशंका

निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक दल को परिसर के भीतर हजारों किलोग्राम तैयार एनालॉग पनीर का विशाल स्टॉक मिला। प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई कि इस पनीर को बनाने में डेयरी दूध की जगह वनस्पति तेल, स्टार्च और अन्य रसायनों का इस्तेमाल किया जा रहा था। टीम ने स्वास्थ्य मानकों की जांच के उद्देश्य से विभिन्न बैचों के सैंपल एकत्र किए और उन्हें परीक्षण के लिए राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजने की प्रक्रिया पूरी की।

करीब तीन एकड़ में फैला है फैक्ट्री परिसर, प्रशासनिक ताला जड़ा गया

वैद्या फूड प्रोडक्ट्स का ढांचा काफी बड़ा है और यह लगभग तीन एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। जांच टीम ने उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली मशीनों, कच्चे माल के गोदामों और पैकेजिंग सेक्शन की गहनता से तलाशी ली। साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ रोकने और जांच प्रक्रिया पूरी होने तक प्रशासन ने मुख्य गेट समेत पूरी फैक्ट्री को आधिकारिक तौर पर सील कर दिया है।

एनालॉग पनीर के सेहत पर पड़ते हैं गंभीर प्रभाव, गुणवत्ता पर उठे सवाल

बाजार में असली पनीर के नाम पर बेचे जाने वाले एनालॉग पनीर में दूध का फैट बिल्कुल नहीं होता है। इसे सस्ते पाम ऑयल और केमिकल से तैयार किया जाता है, जो मानव शरीर के लिए बेहद हानिकारक माना जाता है। प्रशासन की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य बाजार में बिक रहे इस प्रकार के मिलावटी और प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाना है। प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट आने के बाद ही उत्पाद की वास्तविक गुणवत्ता स्पष्ट होगी।

कार्रवाई के अंतिम चरण में दी गई खाद्य विभाग को सूचना, कार्यशैली पर संशय

इस पूरे मामले में जिले के खाद्य सुरक्षा विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से शिकायतें मिलने के बावजूद विभागीय अधिकारियों द्वारा कार्रवाई न किए जाने की बातें सामने आ रही थीं। यही कारण रहा कि एडीएम नेतृत्व वाली विशेष टीम ने खाद्य विभाग के स्थानीय अधिकारियों को छापेमारी के बिल्कुल अंतिम दौर में सूचित किया, ताकि जानकारी लीक होने की गुंजाइश न रहे।

मध्य प्रदेश से मंगाकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा में सप्लाई का आरोप

शुरुआती जांच में यह बात भी निकलकर सामने आई है कि फैक्ट्री संचालक न केवल स्थानीय स्तर पर उत्पादन कर रहे थे, बल्कि मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों से भी एनालॉग पनीर की खेप मंगाते थे। इस पनीर को पैकेजिंग बदलकर छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों और पड़ोसी राज्य ओडिशा के बाजारों में खपाया जाता था। प्रशासन अब इस पूरे अंतर्राज्यीय सप्लाई नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटा है।

दस्तावेज और उत्पादन रिकॉर्ड खंगाल रही प्रशासनिक टीम

कार्यालयीन जांच के तहत प्रशासनिक अधिकारी फैक्ट्री के कागजात, जीएसटी रिटर्न, कच्चे माल की खरीद-बिक्री के बिल और श्रम विभाग से जुड़ी स्वीकृतियों की फाइलें खंगाल रहे हैं। यह भी जांच की जा रही है कि फैक्ट्री संचालन के लिए पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण (FSSAI) से आवश्यक लाइसेंस लिए गए थे या नहीं। नियमों में अनदेखी पाए जाने पर अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाएगा।

सैंपल रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी सख्त कानूनी कार्रवाई

फैक्ट्री से लिए गए खाद्य नमूनों को सीलबंद कर परीक्षण के लिए भेज दिया गया है। जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद यदि मिलावट या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो फैक्ट्री मालिकों और प्रबंधन से जुड़े जिम्मेदार लोगों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। तब तक परिसर पूरी तरह सील रहेगा।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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