
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में स्वास्थ्य विभाग के भीतर फर्जी ट्रांसफर ऑर्डर तैयार करने का एक बड़ा मामला सामने आया है।इस फर्जीवाड़े में छत्तीसगढ़ पुलिस ने पलारी थाने में केस दर्ज कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों समेत कुल चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।मामला तूल पकड़ते ही भाजपा संगठन ने भी कड़ी कार्रवाई करते हुए अपने दोनों पदाधिकारियों को पार्टी के दायित्वों से तत्काल प्रभाव से मुक्त कर दिया है।
सोशल मीडिया पर बड़े नेताओं के साथ जमाते थे धाक, फर्जीवाड़े में धरे गए जिला महामंत्री
Krishna Awasthi Arrested: मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल भाजपा के जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी और जिला उपाध्यक्ष पुनिराम पटेल की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। जांच में सामने आया है कि कृष्णा अवस्थी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते थे और सांसद, पूर्व मंत्री से लेकर संगठन के हर बड़े नेता के साथ अपनी तस्वीरें साझा कर प्रभाव जमाते थे। पार्टी ने उनकी इसी सक्रियता को देखते हुए उन्हें जिला महामंत्री जैसे जिम्मेदार पद से नवाजा था, लेकिन फर्जी ट्रांसफर रैकेट में नाम आते ही पुलिस ने उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया।
पलारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से शुरू हुई जांच, बीएमओ की शिकायत पर खुला भेद
Palari Hospital Transfer Scam: फर्जीवाड़े की यह पूरी कहानी पलारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से शुरू हुई। यहां पदस्थ ग्रामीण चिकित्सा सहायक करण कुमार देवांगन ने 14 अगस्त 2026 की तारीख वाला एक ट्रांसफर आदेश प्रस्तुत किया। इस आदेश में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) बलौदाबाजार का फर्जी जावक नंबर दर्ज था, जिसमें करण देवांगन को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रोहांसी से हटाकर मोपर (भाटापारा) में पदस्थ करने की बात लिखी गई थी। प्रस्तुत आदेश को देखकर खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. पंकज वर्मा को संदेह हुआ, जिसके बाद उन्होंने इसकी सत्यता की जांच शुरू कराई।

सीएमएचओ दफ्तर ने आदेश को बताया पूरी तरह फर्जी, अधिकारी ने अपने दस्तखत से किया इनकार
Balodabazar Fake Transfer Case: खंड चिकित्सा अधिकारी द्वारा दस्तावेज उच्च कार्यालय भेजने पर चौंकाने वाला खुलासा हुआ। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बलौदाबाजार ने 17 अगस्त को लिखित पत्र जारी कर स्पष्ट किया कि उनके कार्यालय से ऐसा कोई भी ट्रांसफर आदेश जारी नहीं किया गया है। इतना ही नहीं, आदेश की प्रति पर अंकित हस्ताक्षरों को भी संबंधित अधिकारी ने अपना मानने से साफ इनकार कर दिया। इसके साथ ही विभाग ने अवगत कराया कि संबंधित पद राज्य संवर्ग के अंतर्गत आता है और वर्तमान में पूरे प्रदेश में तबादलों पर शासन का प्रतिबंध लागू है।
पुलिस जांच में खुले सरकारी तंत्र में कूटरचना के राज, चार आरोपी गिरफ्तार
स्वास्थ्य विभाग से पत्र मिलने के बाद पलारी पुलिस ने मामला दर्ज कर गहन जांच शुरू की। बीएमओ के बयान और प्रस्तुत दस्तावेजों के फोरेंसिक मिलान में यह साबित हो गया कि आरोपियों ने सरकारी अधिकारी की फर्जी मुहर और हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर यह कूट रचित पत्र तैयार किया था। पुलिस ने ठोस सबूतों के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपी करण कुमार देवांगन, भाजपा जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी, जिला उपाध्यक्ष पुनिराम पटेल और एक अन्य सहयोगी रवि कुमार सेन को गिरफ्तार कर लिया है।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज, अन्य कड़ियों की तलाश जारी
पलारी पुलिस ने मामले में धारा 318(4), 336(3), 337, 338, 340(2) और 3(5) के तहत संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस फर्जी ट्रांसफर पत्र को तैयार करने में किस कंप्यूटर या प्रिंटर का इस्तेमाल किया गया था और क्या इससे पहले भी इस गिरोह ने अन्य अधिकारियों के फर्जी आदेश तैयार किए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विवेचना जारी है और इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों पर भी जल्द शिकंजा कसा जाएगा।
फर्जीवाड़े पर कसता कानून का शिकंजा, पार्टी ने भी तुरंत झाड़ा पल्ला
इस मामले में एफआईआर दर्ज होते ही सत्तारूढ़ पार्टी ने भी कड़ा रुख अपनाया है। शासन और संगठन की छवि धूमिल होने से बचाने के लिए पार्टी नेतृत्व ने बिना देरी किए दोनों आरोपी नेताओं को पदमुक्त कर दिया।दूसरी ओर, पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक कार्यों में फर्जीवाड़ा करने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल या पद से ताल्लुक रखता हो।



