
CG Healthcare Rules 2026: छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिजनों के स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरा को बढ़ाते हुए बड़ा निर्णय लिया है। सरकार ने देश के विभिन्न प्रमुख शहरों में स्थित 66 बड़े निजी अस्पतालों को अधिमान्य यानी मान्यता प्राप्त सूची में शामिल किया है। इस फैसले के बाद प्रदेश के कर्मचारी अब दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, हैदराबाद और चेन्नई जैसे बड़े शहरों के प्रतिष्ठित अस्पतालों में अपनी गंभीर बीमारियों का इलाज करा सकेंगे।
दिल्ली और मुंबई समेत देश के 66 बड़े निजी अस्पताल शामिल
CG Govt Employee Treatment: नई व्यवस्था के तहत देश भर के 66 नामचीन निजी अस्पतालों को इस सूची में जगह दी गई है। इनमें मेदांता, सर गंगाराम अस्पताल, शेल्बी अस्पताल, जसलोक, सीएमसी वेल्लोर, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल, शंकर नेत्रालय और अपोलो अस्पताल जैसे संस्थान शामिल हैं। इन अस्पतालों में गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज के लिए अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक उपलब्ध है, जिससे प्रदेश के कर्मचारियों को अब बेहतर इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
प्रदेश में पदस्थ कर्मचारियों के लिए रेफरल लेटर लेना अनिवार्य
CG New Medical Rules: छत्तीसगढ़ में पदस्थ सरकारी सेवकों और उनके आश्रितों को इन बाहर के अस्पतालों में इलाज कराने के लिए शासकीय व्यवस्था के तहत रेफरल लेटर लेना होगा। जिला या राज्य स्तर के मेडिकल बोर्ड द्वारा रेफर किए जाने पर ही वे इन 66 अधिमान्य अस्पतालों में इलाज की पात्रता रखेंगे। हालांकि, नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ शासन के अधीन कार्यरत कर्मचारियों को दिल्ली स्थित अधिमान्य अस्पतालों में सीधे इलाज कराने की छूट रहेगी।
2024 की सीमित सूची को लेकर कर्मचारियों ने दर्ज कराई थी आपत्ति
वर्ष 2024 में राज्य सरकार द्वारा इलाज के लिए बेहद सीमित संख्या में अस्पतालों को मान्यता दी गई थी। इस कारण गंभीर बीमारियों से पीड़ित कर्मचारियों को अपनी पसंद और सुविधा के अनुसार अस्पताल चुनने में काफी परेशानी आती थी। कर्मचारी संगठनों ने इस सीमित सूची का विरोध करते हुए इसे बढ़ाने की मांग की थी। उसी मांग को ध्यान में रखते हुए शासन ने इस बार 66 प्रमुख चिकित्सा संस्थानों को शामिल किया है।
राज्य के भीतर भी 100 से अधिक अस्पतालों में इलाज का विकल्प
दूसरे राज्यों के 66 बड़े अस्पतालों के अलावा छत्तीसगढ़ के भीतर भी कर्मचारियों के पास इलाज के कई विकल्प मौजूद हैं। राज्य के अंदर 100 से अधिक निजी और सरकारी अस्पतालों में कर्मचारी अपनी बीमारियों का इलाज करा सकते हैं। हालांकि अति-गंभीर परिस्थितियों या विशेष सर्जरी के लिए कर्मचारी राज्य से बाहर के मान्यता प्राप्त अस्पतालों को प्राथमिकता देते हैं, जिसके लिए अब रास्ते साफ कर दिए गए हैं।
रिअंबर्समेंट मॉडल पर होगा इलाज, पहले करना होगा भुगतान
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन अधिमान्य अस्पतालों में इलाज की प्रक्रिया पूरी तरह कैशलेस नहीं होगी। कर्मचारी या उनके परिजनों को इलाज के दौरान होने वाले खर्च का भुगतान शुरुआत में खुद ही करना पड़ेगा। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद इलाज के दौरान लगे सभी मूल बिलों, दवाओं की पर्चियों और रिपोर्ट को जमा करके मेडिकल रिअंबर्समेंट के लिए आवेदन करना होगा।
जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीधे खाते में आएगी राशि
इलाज पूरा होने के बाद जब कर्मचारी अपने चिकित्सा बिल जमा करेंगे, तब बड़े मेडिकल क्लेम को जांच के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग के पास भेजा जाएगा। विभाग के अधिकारियों द्वारा सभी दस्तावेजों की सत्यता और स्वीकृत दरों की जांच की जाएगी। क्लेम मंजूर होने के बाद सरकार द्वारा निर्धारित रिअंबर्समेंट की राशि सीधे संबंधित कर्मचारी के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी।
गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अब मिलेंगे बेहतर विकल्प
सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य शासकीय सेवकों को समय पर गुणवत्तापूर्ण और उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा प्रदान करना है। 66 बड़े अस्पतालों को जोड़ने से कैंसर, दिल की बीमारी, न्यूरो और ऑर्गन ट्रांसप्लांट जैसी जटिल बीमारियों का इलाज आसान हो जाएगा। इससे कर्मचारियों को देश के सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञों से परामर्श और इलाज कराने का अवसर मिलेगा।



