
CG Caste Certificate New Rules: छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र बनवाने के दौरान पुराने दस्तावेजों को लेकर आ रही तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इस संबंध में एक नया परिपत्र जारी कर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। नए आदेश के अनुसार, जिनके पूर्वजों के पुराने राजस्व अभिलेखों में ‘चमार’ या ‘मोची’ दर्ज है, वे जरूरी जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ‘रोहिदास’ नाम से जाति प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकेंगे। सरकार के इस फैसले से सालों से भटक रहे सैकड़ों आवेदकों को राहत मिलेगी।
दस्तावेजों में नाम के अंतर से आ रही थी अड़चन
Chhattisgarh SC Certificate Guidelines: राज्य के कई जिलों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि पुराने जमीनी रिकॉर्ड और वर्तमान में उपयोग किए जा रहे जातिगत नाम में अंतर होने की वजह से प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पा रहे थे। कई परिवारों के पुराने राजस्व कागजातों में ‘चमार’ या ‘मोची’ अंकित था, जबकि आवेदक ‘रोहिदास’ नाम से प्रमाण पत्र की मांग कर रहे थे। सक्षम अधिकारी पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान पहचान के बीच संबंध स्पष्ट न होने का हवाला देकर आवेदन निरस्त या लंबित रख देते थे, जिससे आवेदकों को परेशानी झेलनी पड़ रही थी।
एक ही सूची में शामिल हैं संबंधित जातियां
Chhattisgarh GAD Order On Caste Certificate: सामान्य प्रशासन विभाग ने अपने आदेश में छत्तीसगढ़ के लिए अधिसूचित अनुसूचित जातियों की संवैधानिक सूची का स्पष्ट उल्लेख किया है। इस सूची के सरल क्रमांक 14 में चमार, चमारी, बेरवा, भांबी, जाटव, मोची, रैगर, नोना, रोहिदास, रामनामी, सतनामी, सूर्यवंशी, सूर्यरामनामी, अहिरवार, मांगन और रैदास जैसी परस्पर जुड़ी जातियों को एक साथ रखा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया कि जब ये सभी नाम एक ही संवैधानिक श्रेणी में शामिल हैं, तो नाम के शाब्दिक अंतर के आधार पर आवेदन रोकना सही नहीं है।
निर्धारित जांच प्रक्रिया के बाद ही मिलेगा प्रमाण पत्र
Chhattisgarh Government Caste Certificate Order: सरकार ने साफ किया है कि यह छूट बिना किसी सत्यापन के स्वतः लागू नहीं होगी। आवेदक को निर्धारित प्रारूप में विधिवत आवेदन करना होगा। इसके बाद संबंधित सक्षम अधिकारी सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा तय मानकों के आधार पर मामले का सूक्ष्म परीक्षण करेंगे। स्थानीय जांच, वंशावली और सामाजिक पृष्ठभूमि के सत्यापन में जब यह पुष्टि हो जाएगी कि आवेदक संबंधित जाति समूह से ही ताल्लुक रखता है, तब आधिकारिक तौर पर रोहिदास जाति का प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा।
संवैधानिक अधिकारों और आरक्षण पर नहीं पड़ेगा असर
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस व्यवस्था से आरक्षण व्यवस्था या संवैधानिक अधिकारों पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा। चूंकि चमार, मोची और रोहिदास जातियां अनुसूचित जाति सूची के एक ही क्रमांक का हिस्सा हैं, इसलिए इससे किसी नए वर्ग का प्रवेश नहीं हो रहा है। इस आदेश का मूल उद्देश्य केवल अभिलेखों में दर्ज पुराने शब्दों और आधुनिक उपयोग में आ रहे शब्दों के बीच के तकनीकी अंतर को खत्म करना है, ताकि योग्य पात्रों को सरकारी योजनाओं और नौकरियों का लाभ मिल सके।
आवेदकों को मिलेगी भटकने से मुक्ति
इस परिपत्र के जारी होने के बाद अब तहसील और जिला स्तर के राजस्व अधिकारियों को दिशा-निर्देश भेज दिए गए हैं। प्रशासनिक स्पष्टता आने से अब जिला स्तरीय सत्यापन समितियों और अनुविभागीय अधिकारियों (SDM) के पास लंबित पड़े प्रकरणों का त्वरित निपटारा हो सकेगा। आवेदकों को अब अनावश्यक अदालती शपथ पत्र या जटिल दस्तावेजी प्रक्रियाओं के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और तय समय-सीमा के भीतर जाति प्रमाण पत्र जारी हो सकेंगे।



