
CG Guest Lecturer Policy 2026 Amended: छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत शासकीय महाविद्यालयों में लागू अतिथि व्याख्याता नीति-2024 में किए गए संशोधनों को राज्य सरकार की मंत्रिपरिषद ने कार्याेत्तर अनुमोदन प्रदान कर दिया है। प्रशासकीय अनुमोदन के बाद जारी इस संशोधित नीति-2026 में भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण नए प्रावधान जोड़े गए हैं। इस निर्णय से प्रदेश के हजारों अतिथि व्याख्याताओं को राहत मिलेगी और चयन प्रक्रिया में स्थानीय युवाओं को स्पष्ट अवसर मिलेगा।
समान अंक होने पर छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को मिलेगी वरीयता
CG Higher Education Cabinet Decisions: संशोधित नीति-2026 में मेरिट निर्धारण की प्रक्रिया को पहले से अधिक स्पष्ट कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत यदि मेरिट सूची में एक ही वर्ग या श्रेणी के दो अभ्यर्थियों के अंक बिल्कुल समान होते हैं, तो छत्तीसगढ़ के मूल निवासी आवेदक को वरीयता दी जाएगी। इस फैसले का सीधा फायदा प्रदेश के स्थानीय युवाओं को मिलेगा, जिससे समान अंक की स्थिति में बाहरी अभ्यर्थियों की तुलना में स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता मिलना तय हो गया है।
राजकीय विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक अनुभव के भी जुड़ेंगे 5 अंक
CG Guest Lecturer Recruitment Policy: अनुभव के अंकों को लेकर भी नीति में बड़ा सुधार किया गया है। निर्धारित अधिकतम 30 अंकों के दायरे में अब शासकीय महाविद्यालयों के साथ-साथ राजकीय विश्वविद्यालयों (स्टेट यूनिवर्सिटी) में किए गए अध्यापन कार्य को भी मान्यता दी गई है। यदि किसी अभ्यर्थी ने राजकीय विश्वविद्यालय में एक शैक्षणिक सत्र में न्यूनतम 5 महीने तक अध्यापन कार्य पूरा किया है, तो उसे 5 अंक का अनुभव लाभ दिया जाएगा। पुरानी नीति में विश्वविद्यालय के अनुभव का यह लाभ स्पष्ट रूप से शामिल नहीं था।
विस्थापित अतिथि व्याख्याताओं को रिक्त पदों पर मिलेगा पुनर्नियोजन
CG Government Cabinet Decisions Guest Lecturers: कैबिनेट ने पूर्व में हटाए गए या विस्थापित हुए अतिथि व्याख्याताओं के हित में बड़ा फैसला लिया है। निर्णय के अनुसार, शासकीय कॉलेजों और राजकीय विश्वविद्यालयों के विस्थापित अतिथि व्याख्याताओं के पूर्व कार्य-अनुभव को ध्यान में रखते हुए उन्हें रिक्त पदों पर पुनर्नियोजन का अवसर प्रदान किया जाएगा। इस कदम से लंबे समय से सेवा दे चुके योग्य शैक्षणिक अमले को रोजगार की सुरक्षा मिलेगी और महाविद्यालयों में पठन-पाठन की व्यवस्था सुचारू होगी।
कालखंड के स्थान पर अब कार्य-दिवस के आधार पर तय होगा मानदेय
अतिथि व्याख्याताओं के मानदेय भुगतान में लंबे समय से चली आ रही विसंगतियों को खत्म कर दिया गया है। अब पीरियड या कालखंड आधारित व्यवस्था के स्थान पर ‘कार्य-दिवस’ आधारित मानदेय व्यवस्था लागू की जाएगी। इस बदलाव से शिक्षकों को उनके कार्यदिवसों के हिसाब से पारदर्शी मानदेय मिल सकेगा। इसके साथ ही अतिथि व्याख्याताओं और अन्य शैक्षणिक अमले के कार्य-दायित्व, दैनिक कार्य-अवधि और आकस्मिक अवकाश (कैजुअल लीव) से जुड़े नियमों को भी पूरी तरह स्पष्ट कर दिया गया है।



