
Jio Poor Network Fine CG: छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा एक बेहद अहम फैसला सामने आया है। खराब मोबाइल नेटवर्क और सुस्त इंटरनेट स्पीड के कारण एक छात्र की पढ़ाई प्रभावित होने पर बैकुंठपुर स्थित जिला उपभोक्ता आयोग ने रिलायंस जियो कंपनी को सेवा में कमी का दोषी माना है। आयोग ने कंपनी को पीड़ित छात्र अभिनय पांडेय को कुल 14 हजार रुपये का भुगतान करने का कड़ा आदेश सुनाया है। इस राशि में 10 हजार रुपये मानसिक व शैक्षणिक परेशानी का मुआवजा और 4 हजार रुपये मुकदमे का खर्च शामिल है।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अड़चन, नोट्स डाउनलोड करने में हुई परेशानी
Koriya District Consumer Court Verdict: कोरिया जिले के सलका गांव निवासी अभिनय पांडेय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और इसके लिए वे रिलायंस जियो के सिम कार्ड का इस्तेमाल करते थे। उनके गांव में पिछले कई महीनों से नेटवर्क की स्थिति बेहद खराब चल रही थी। बार-बार फोन कटने और इंटरनेट की गति नगण्य रहने के कारण वे न तो ऑनलाइन कक्षाओं में शामिल हो पाते थे और न ही अध्ययन सामग्री डाउनलोड कर पाते थे। इससे उनकी पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा था।
2023 में की थी पहली ईमेल शिकायत, दो साल तक नहीं सुधरे हालात
CG Consumer Forum News: छात्र ने सबसे पहले 21 सितंबर 2023 को जियो के अपीलीय अधिकारी को ईमेल भेजकर नेटवर्क की शिकायत दर्ज कराई थी। कंपनी ने अगले ही दिन जवाब भेजकर अपने क्षेत्र में नेटवर्क की समस्या को स्वीकार किया और छह महीने के भीतर नया टावर या उपकरण लगाकर सुधार करने का लिखित भरोसा दिया था। हालांकि, शिकायतकर्ता के अनुसार दो साल का लंबा समय बीत जाने के बाद भी सलका गांव में नेटवर्क की स्थिति जस की तस बनी रही।
जन शिकायत पोर्टल पर विरोधाभासी जवाब, कंपनी ने दी नंबर पोर्ट करने की सलाह
Reliance Jio Fine Chhattisgarh: परेशान होकर छात्र ने केंद्र सरकार के सीपीजीआरएएमएस पोर्टल पर भी दो बार शिकायत दर्ज कराई। पहली बार कंपनी ने जवाब दिया कि क्षेत्र में पर्याप्त कवरेज मौजूद है, जबकि दूसरी शिकायत पर उसी स्थान को सीमित कवरेज क्षेत्र बताकर केस बंद कर दिया गया। जब छात्र ने लगातार सुधार की मांग की, तो कंपनी प्रतिनिधियों ने नेटवर्क सुधारने के बजाय उन्हें अपना मोबाइल नंबर किसी दूसरी टेलीकॉम कंपनी में पोर्ट कराने का अजीब तर्क दे डाला।
जियो ने कोर्ट में दिया दलील: आर्थिक लाभ न हो तो नया टावर लगाना जरूरी नहीं
Chhattisgarh Consumer Court Decision: मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचने पर रिलायंस जियो ने अपनी सफाई में तर्क दिया कि सलका गांव में कंपनी का खुद का मोबाइल टावर स्थापित नहीं है। कंपनी के वकीलों ने यह दलील भी दी कि दूरसंचार कंपनियां उन इलाकों में नया ढांचा खड़ा करने या भारी निवेश करने के लिए बाध्य नहीं हैं जहां से पर्याप्त व्यावसायिक लाभ न मिलता हो। साथ ही जियो ने छात्र द्वारा लगातार रीचार्ज कराए जाने को भी अपने बचाव का आधार बनाया।
आयोग ने जियो की दलीलों को किया खारिज, कहा: सेवा देना कंपनी की प्राथमिक जिम्मेदारी
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष राकेश पांडेय और सदस्य चूरामन दास की पीठ ने जियो कंपनी के तर्कों को पूरी तरह बेबुनियाद करार देते हुए खारिज कर दिया। आयोग ने अपने फैसले में कहा कि यदि कंपनी किसी क्षेत्र में अपनी सेवाएं बेच रही है और ग्राहकों से रीचार्ज के पैसे ले रही है, तो उन्हें निर्बाध सेवा देना उसकी संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है। शिकायत के बाद भी सुधार न करना और ग्राहक को दूसरी कंपनी में जाने को कहना स्पष्ट रूप से सेवा में भारी लापरवाही को दर्शाता है।
60 दिनों के भीतर करना होगा भुगतान, देरी होने पर लगेगा 9 प्रतिशत ब्याज
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के प्रावधानों के तहत सुनवाई करते हुए आयोग ने 7 अक्टूबर 2026 को अपना अंतिम फैसला सुनाया। फैसले के तहत जियो को 60 दिनों की समयसीमा के भीतर 14 हजार रुपये की कुल राशि शिकायतकर्ता को सौंपनी होगी। यदि कंपनी तय समय में इस राशि का भुगतान नहीं करती है, तो उसे 10 हजार रुपये की मुख्य मुआवजा राशि पर 9 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से ब्याज भी चुकाना पड़ेगा।
ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं के लिए नजीर बना उपभोक्ता आयोग का यह फैसला
सुदूर ग्रामीण इलाकों में मोबाइल नेटवर्क की घटिया सेवाओं से जूझ रहे लाखों उपभोक्ताओं के लिए यह फैसला एक बड़ी नजीर साबित होगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से बड़ी टेलीकॉम कंपनियों पर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा सुधारने का दबाव बढ़ेगा। अब कंपनियां केवल मुनाफा न होने का बहाना बनाकर घटिया नेटवर्क सेवा देने के अपने दायित्व से आसानी से बच नहीं सकेंगी।



