धमतरी में गंगरेल बांध के डूब प्रभावितों का फूटा गुस्सा, हाईकोर्ट के आदेश के 6 साल बाद भी नहीं मिला न्याय, शुरू हुआ जल सत्याग्रह

Dhamtari Gangrel Dam News: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में गंगरेल बांध के डूब प्रभावित परिवारों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन और तेज कर दिया है। विस्थापित परिवारों ने न्याय की मांग करते हुए 12 अक्टूबर 2026 से बरदीहा लेक व्यू रिसॉर्ट के पीछे अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। आंदोलनकारियों का मुख्य आरोप है कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद पिछले करीब छह वर्षों में पात्र परिवारों की पात्रता जांच और भूमि आवंटन की प्रक्रिया में कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाई है, जिससे प्रभावितों में भारी नाराजगी है।

वर्ष 2020 के हाईकोर्ट के आदेश के पालन की मांग को लेकर फूटा गुस्सा

Chhattisgarh High Court Order 2020: यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में दायर विभिन्न याचिकाओं से जुड़ा हुआ है। आंदोलनकारियों के मुताबिक, इन मामलों में उच्च न्यायालय ने 16 दिसंबर 2020 को आदेश पारित किया था। प्रभावितों का कहना है कि न्यायालय के इस फैसले के बाद उन्हें उम्मीद जगी थी कि विस्थापन और जमीन से जुड़े उनके अधिकारों का कानूनी समाधान जल्द निकल जाएगा। हालांकि, प्रशासनिक सुस्ती के कारण आदेश के इतने साल बीत जाने के बाद भी धरातल पर पात्र परिवारों को राहत नहीं मिल सकी है, जिसके चलते उन्हें दोबारा सड़कों पर उतरना पड़ा है।

केवल आश्वासन नहीं, बल्कि पात्रता जांच और भूमि आवंटन की ठोस समयसीमा चाहिए

धरना प्रदर्शन कर रहे परिवारों का कहना है कि अब उन्हें लंबे-चौड़े आश्वासनों की जरूरत नहीं है, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है। उनकी मुख्य मांग है कि हाईकोर्ट के आदेश का अक्षरशः पालन करते हुए सभी पात्र डूब प्रभावित परिवारों की नए सिरे से पारदर्शी जांच की जाए और इसके बाद नियमानुसार भूमि आवंटन की प्रक्रिया को बिना किसी देरी के आगे बढ़ाया जाए। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक प्रशासन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

बरदीहा में शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा धरना, प्रशासन पर टिकी निगाहें

प्रभावित परिवारों ने बरदीहा लेक व्यू रिसॉर्ट के पीछे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपना अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है। इस आंदोलन के माध्यम से वे शासन-प्रशासन का ध्यान अपनी बरसों पुरानी समस्याओं की ओर आकर्षित करना चाहते हैं। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों के अधिकारियों पर अब इस मामले का संज्ञान लेने का दबाव बढ़ गया है। यह देखना अहम होगा कि शासन स्तर पर इस आंदोलन के बाद क्या प्रतिक्रिया आती है और विस्थापितों को जमीन आवंटन को लेकर कब तक आधिकारिक रूप से कोई राहत मिलती है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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