
Nagri Leopard Attack News: छत्तीसगढ़ के नगरी-सिहावा वनांचल क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से आतंक का पर्याय बने तेंदुए को आखिरकार ग्रामीणों ने पकड़ लिया है। शुक्रवार की सुबह नगरी ब्लॉक के आमानारा गांव में तेंदुए ने चार साल की एक बच्ची पर अचानक हमला कर दिया। अपनी बेटी की जान बचाने के लिए पिता सुरेश मरकाम बिना किसी हिचकिचाहट के सीधे तेंदुए से जा भिड़े। इसके बाद मौके पर जुटे ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर असाधारण साहस दिखाया और तेंदुए को दबोच लिया।

आमानारा गांव में बच्ची पर हमला और पिता का जान की बाजी लगाना
Chhattisgarh Leopard Terror Nagri: शुक्रवार की सुबह आमानारा गांव में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक खूंखार तेंदुआ अचानक आवासीय बस्ती के पास आ धमका। तेंदुए ने चार वर्षीय सुहानी मरकाम को अपना शिकार बनाने की कोशिश की। अपनी बेटी को मौत के मुंह में जाते देख पिता सुरेश मरकाम ने तुरंत छलांग लगाई और तेंदुए से मुकाबला शुरू कर दिया। शोर सुनकर आसपास के ग्रामीण भी लाठी-डंडों के साथ मौके पर दौड़ पड़े और तेंदुए को घेर लिया।

हमले में 42 वर्षीय ग्रामीण प्रभुराम की मौत, कई लोग गंभीर रूप से घायल
Amanara Nagri Leopard Rescue Update: इस पूरे घटनाक्रम के दौरान तेंदुए ने कई अन्य ग्रामीणों को भी अपनी चपेट में ले लिया। हमले में 42 वर्षीय प्रभुराम गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजनों और स्थानीय लोगों ने उन्हें तुरंत नगरी अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। इस हमले में घायल हुए अन्य लोगों का इलाज स्थानीय अस्पताल में चल रहा है, जिससे इलाके के लोगों में भारी गुस्सा और दहशत का माहौल है।
पिछले तीन दिनों से सीतानदी अभयारण्य के आसपास बना हुआ था भारी तनाव
Bastar Kanker Leopard Attacks: स्थानीय निवासियों के अनुसार, सीतानदी टाइगर रिजर्व और उससे लगे वनांचल गांवों में पिछले तीन दिनों से तेंदुए की आवाजाही बनी हुई थी। तेंदुआ दिनदहाड़े गांवों के करीब आ रहा था और लोगों तथा मवेशियों पर हमले कर रहा था। कारीपानी और बहीगांव जैसे इलाकों में भी लगातार हमले की सूचना मिल रही थी। डर के कारण ग्रामीणों ने खेतों में जाना और सुबह के वक्त घरों से बाहर निकलना बंद कर दिया था।
ग्रामीणों की एकजुटता के बाद मौके पर पहुंचा वन विभाग का अमला
Leopard Rabies Test Jungle Safari Raipur: ग्रामीणों ने जब अपने दम पर तेंदुए को घेरकर काबू में कर लिया, तब जाकर इसकी सूचना वन विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से तेंदुए को अपने कब्जे में लिया। लोगों का कहना है कि यदि ग्रामीण समय पर एकजुट होकर साहस न दिखाते, तो यह तेंदुआ और भी कई लोगों की जान ले सकता था। इस घटना के बाद से प्रशासन पर वन्यजीव सुरक्षा और निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

कारीपानी और बस्तर के इलाकों में भी सामने आई हैं दर्दनाक घटनाएं
नगरी ब्लॉक के ही कारीपानी गांव में भी पिछले दिनों तेंदुए के हमलों में कई लोग घायल हुए थे। इसके अलावा कुछ अन्य क्षेत्रों से भी वन्यजीवों के हमलों में जनहानि की खबरें सामने आई हैं। हालांकि वन विभाग के अधिकारी अभी यह स्पष्ट करने में जुटे हैं कि अलग-अलग गांवों में हुए इन हमलों के पीछे एक ही तेंदुआ था या फिर अलग-अलग जंगली जानवर इन वारदातों को अंजाम दे रहे थे।
अजीब आक्रामक व्यवहार को देखते हुए रेबीज की आशंका पर होगी जांच
पकड़े गए तेंदुए को सुरक्षित रूप से जंगल सफारी भेजने की प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इस तेंदुए के सामान्य से अधिक आक्रामक और असामान्य व्यवहार को देखते हुए विशेषज्ञों द्वारा इसकी चिकित्सकीय जांच कराई जाएगी। तेंदुए में रेबीज या अन्य किसी बीमारी के संक्रमण की आशंका है, जिसकी पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
घायलों के इलाज और पीड़ित परिवार को मुआवजे की मांग तेज
घटना के बाद से क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए और घायलों का मुफ्त इलाज हो। साथ ही ग्रामीणों ने यह भी मांग रखी है कि वनांचल क्षेत्रों के गांवों के आसपास पिंजरे लगाकर नियमित पेट्रोलिंग की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
तेंदुए के पकड़े जाने से राहत, लेकिन सुरक्षा को लेकर चिंता अब भी बरकरार
घंटों चली जद्दोजहद और खौफ के बाद तेंदुआ के पकड़े जाने से आमानारा और आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, ग्रामीणों के मन से डर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। लोगों का कहना है कि जब तक वन विभाग घने जंगलों से सटे इलाकों में स्थायी सुरक्षा के उपाय नहीं करता, तब तक उनका सामान्य जीवन पटरी पर लौटना मुश्किल है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।



