
Greater Flamingo In Gangrel Dam: छत्तीसगढ़ की जैव विविधता और पर्यावरण प्रेमियों के लिए एक बेहद सुखद खबर सामने आई है। गुजरात के कच्छ और ओडिशा की चिल्का झील की पहचान माने जाने वाले बेहद खूबसूरत गुलाबी पक्षी यानी राजहंस (फ्लेमिंगो) अब छत्तीसगढ़ की धरती पर भी नजर आने लगे हैं। वन्यजीव फोटोग्राफरों और पक्षी प्रेमियों ने कांकेर और धमतरी जिले की सीमा पर स्थित गंगरेल बांध के तटों पर इनके झुंड को अपने कैमरों में कैद किया है। इसके साथ ही राज्य में दर्ज पक्षियों की कुल 502 प्रजातियों की सूची में फ्लेमिंगो के रूप में एक और नया और शानदार मेहमान शामिल हो गया है।
विशेषज्ञों के शोध दल ने की गंगरेल में फ्लेमिंगो की मौजूदगी की पुष्टि
Gangrel Reservoir Bird Tourism: पक्षी विशेषज्ञों गोपी किशन साहू, अमर मुलवानी, एएमके भरोस और योगिता साहू के शोध दल ने जून 2025 से मार्च 2026 के बीच गंगरेल के हरफर, पटौद, चिखली और फुटाहामुड़ा इलाकों में विशेष अध्ययन किया। इस दौरान छब्बीस जून 2025 को गंगरेल में पहली बार आठ ग्रेटर फ्लेमिंगो देखे गए, जिनकी संख्या अठ्ठाइस जून को बढ़कर ग्यारह हो गई। इसके बाद एक मार्च 2026 को फुटाहामुड़ा क्षेत्र में सात फ्लेमिंगो का एक और नया झुंड नजर आया, जिससे वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं में काफी उत्साह देखा गया।

चिल्का झील से रण ऑफ कच्छ लौटते समय गंगरेल बनता है ठहराव
Chhattisgarh Birds Update: विशेषज्ञों का कहना है कि ओडिशा की चिल्का झील से गुजरात के रण ऑफ कच्छ की ओर वापसी करते समय ये प्रवासी पक्षी गंगरेल जलाशय को अपना मुख्य विश्राम स्थल यानी स्टॉपओवर बना रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का ऐसा दावा भी है कि अप्रैल महीने के दौरान इन विदेशी मेहमानों की संख्या और अधिक बढ़ जाती है। लंबे सफर के बाद ये पक्षी यहां पानी और सुरक्षित माहौल पाकर कुछ समय के लिए रुकते हैं और अपनी थकान मिटाते हैं।
दुर्लभ प्रजातियों के प्रजनन स्थल के रूप में उभर रहा है यह क्षेत्र
Dhamtari Gangrel Dam News: गंगरेल जलाशय केवल फ्लेमिंगो के लिए ही नहीं, बल्कि स्मॉल प्रैटिनकोल, केंटीश प्लोवर और लिटिल टर्न जैसी कई अन्य दुर्लभ प्रजातियों के लिए भी एक सुरक्षित प्रजनन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। यदि राज्य शासन और वन विभाग इस पूरे इलाके को व्यवस्थित रूप से संरक्षित करे, तो यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय बर्ड टूरिज्म के नक्शे पर एक बड़े केंद्र के रूप में अपनी खास पहचान बना सकता है।

सुरक्षा के अभाव और शिकारियों के डर से टापुओं पर छिप रहे पक्षी
New Bird Species In Chhattisgarh: इस पूरे अध्ययन के दौरान एक चिंताजनक पहलू भी सामने आया है। स्थानीय स्तर पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम न होने और शिकारियों के खौफ के कारण ये पक्षी मुख्य तटों के पास आने से बचते हैं। ये मेहमान तट से लगभग दो किलोमीटर दूर बीच पानी में बने टापुओं पर शरण लेने और छिपकर रहने को मजबूर हैं। विशेषज्ञों ने वन विभाग से पुरजोर मांग की है कि गंगरेल के इन संवेदनशील हिस्सों में शिकार गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए।



