
Leprosy In Chhattisgarh Report 2026: लगभग दो दशक पहले देश में कुष्ठ रोग के खात्मे के दावों के बावजूद मध्य भारत के छत्तीसगढ़ में यह बीमारी एक बार फिर गंभीर चुनौती बनकर उभर रही है। राज्य में संक्रमण का प्रसार दर देश में सबसे चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। छत्तीसगढ़ राज्य मानव अधिकार आयोग के निर्देश पर कराए गए एक विशेष सर्वेक्षण में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि राज्य में करीब अठारह सौ ऐसे नए मरीज मौजूद थे, जो पिछले कुछ वर्षों से स्वास्थ्य विभाग की नजरों से ओझल थे और बिना किसी चिकित्सकीय सुविधा के रह रहे थे।
मानव अधिकार आयोग की पहल से चला संपर्क जांच अभियान
Raipur Leprosy Highest Cases CG: स्वास्थ्य अधिकारों के हनन को देखते हुए राज्य मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष गिरधारी नायक ने इस दिशा में कड़ा रुख अपनाया। आयोग के निर्देशों के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने गांव-गांव जाकर लक्षित जांच अभियान शुरू किया। इसके तहत पहले से चिन्हित कुष्ठ रोगियों के परिजनों और उनके आसपास रहने वाले लोगों की घर-घर जाकर जांच की गई। इस गहन संपर्क जांच प्रक्रिया के परिणामस्वरूप ही अठारह सौ छुपे हुए मरीजों की पहचान हो सकी, जिन्हें अब मल्टी-ड्रग थेरेपी के तहत लाकर इलाज दिया जा रहा है।
रायपुर जिले में सबसे अधिक मरीज, तेईस जिलों में हालात संवेदनशील
CG Human Rights Commission Action: सरकारी आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में इस समय कुल पांच हजार तीन सौ छियासठ पंजीकृत कुष्ठ रोगी हैं। इनमें से अकेले राजधानी रायपुर में ही छह सौ पच्चीस मामले दर्ज हैं, जो पूरे राज्य में सबसे ज्यादा हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने साल 2005 में राष्ट्रीय स्तर पर कुष्ठ रोग उन्मूलन का लक्ष्य हासिल कर लिया था, लेकिन छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, झारखंड, ओडिशा और मध्य प्रदेश मिलाकर देश के कुल मरीजों का पचास प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। छत्तीसगढ़ के तेईस जिलों में स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।
जानिए क्या है कुष्ठ रोग और शरीर पर कैसे पड़ता है इसका असर
कुष्ठ रोग जिसे हैंसेन बीमारी भी कहा जाता है, एक पुरानी संक्रामक बीमारी है जो मायकोबैक्टीरियम लेपरी नाम के जीवाणु से फैलती है। यह जीवाणु मुख्य रूप से त्वचा, परिधीय तंत्रिकाओं, सांस की नली और आंखों को प्रभावित करता है। यह बीमारी अत्यधिक संक्रामक नहीं होती है और केवल किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ लंबे समय तक सीधे या हवा के संपर्क में रहने से फैलती है। समय पर सही इलाज मिलने से मरीज पूरी तरह ठीक हो जाता है और विकलांगता से बच जाता है।
मल्टी-ड्रग थेरेपी से पूरी तरह संभव है कुष्ठ रोग का इलाज
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा कुष्ठ रोग के इलाज के लिए मल्टी-ड्रग थेरेपी यानी एमडीटी दवाएं पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं। इसमें रिफैम्पिसिन, डैप्सोन और क्लोफैज़िमिन जैसी दवाओं का संयोजन शामिल होता है। कम गंभीर स्थिति में छह महीने और अधिक गंभीर मामलों में बारह महीने तक दवा का सेवन करना पड़ता है। भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर जाकर मरीजों की पहचान और मुफ्त इलाज की व्यवस्था की जा रही है।
दुनिया भर के अस्सी प्रतिशत मामले भारत समेत तीन देशों में
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में हर साल कुष्ठ रोग के लगभग एक लाख सत्तर हजार से अधिक नए मामले दर्ज किए जाते हैं। वैश्विक स्तर पर कुल मरीजों में से लगभग अस्सी प्रतिशत मामले भारत, ब्राजील और इंडोनेशिया में पाए जाते हैं, जिनमें सबसे अधिक संख्या भारत की है। यद्यपि दुनिया के एक सौ बीस से अधिक देशों में यह बीमारी पाई जाती है, लेकिन आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और एमडीटी के प्रसार से वैश्विक मामलों में धीरे-धीरे कमी आ रही है।
त्वचा पर सुन्न धब्बे हैं शुरुआती लक्षण, न करें अनदेखी
कुष्ठ रोग के शुरुआती लक्षणों में त्वचा पर हल्के या लाल रंग के सुन्न धब्बे पड़ना मुख्य है, जहां गर्मी, ठंड या दर्द का अहसास समाप्त हो जाता है। यदि इन लक्षणों की अनदेखी की जाए तो हाथों और पैरों की उंगलियों में कमजोरी, चेहरे पर गांठें और स्थायी विकलांगता हो सकती है। यह बीमारी आनुवंशिक नहीं है और न ही केवल छूने से फैलती है। सामाजिक भ्रांतियों को दूर कर शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में एमडीटी उपचार शुरू कराना ही इसके खात्मे का एकमात्र प्रभावी जरिया है।



