
छत्तीसगढ़ की ‘धमतरी धरा’ के गौरवशाली नगर कुरूद के लिए विकास की एक ऐसी नई बयार चली है, जो आने वाली पीढ़ियों की रचनात्मकता को नई ऊंचाइयां प्रदान करेगी। पूर्व मंत्री एवं स्थानीय विधायक अजय चंद्राकर की विशेष पहल और अटूट प्रयासों के फलस्वरूप एक बड़ी उपलब्धि कुरूद को अब 500 सीटर अत्याधुनिक ऑडिटोरियम की सौगात मिलने जा रही है। किसी भी जीवंत नगर का विकास केवल कंक्रीट की सड़कों या ऊँची इमारतों से नहीं, बल्कि वहां की बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से होता है। इसी दर्शन को चरितार्थ करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार के बजट 2026-27 में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई है, जो कुरुदवासियों के लिए किसी बड़े उत्सव से कम नहीं है।
₹7.50 करोड़ की लागत से बनेगा भव्य ऑडिटोरियम
कुरुद की माटी की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक पटल पर निखारने के लिए बजट में ₹7.50 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। विधायक अजय चंद्राकर का मानना है कि बुनियादी ढांचे के साथ-साथ सामाजिक समरसता और कलात्मक संवाद के लिए एक सर्वसुविधायुक्त मंच का होना अनिवार्य है। यह ऑडिटोरियम केवल एक भवन मात्र नहीं होगा, बल्कि यह कुरुद के युवाओं के कौशल, लोक कलाकारों की प्रतिभा और प्रबुद्ध जनों के वैचारिक विमर्श का जीवंत केंद्र बनेगा। बजट में मिली इस मंजूरी ने नगर के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक स्वर्णिम कील ठोक दी है।
सेमिनार और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए ‘स्मार्ट’ सुविधाएं
यह ऑडिटोरियम अपनी भव्यता और आधुनिक सुविधाओं के कारण पूरे क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र होगा। इसकी रूपरेखा इस प्रकार तैयार की गई है कि यहां बड़े स्तर के आयोजनों को सुगमता से संपन्न किया जा सके:
- अत्याधुनिक ध्वनि एवं प्रकाश व्यवस्था: अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप साउंड सिस्टम और लाइटिंग, जो हर प्रस्तुति में जान फूंक देगी।
- 500 दर्शकों की क्षमता: बड़े सेमिनार, कार्यशालाओं और स्कूली सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए आरामदायक और विशाल बैठक व्यवस्था।
- बहुउद्देशीय मंच: लोक विधाओं से लेकर शास्त्रीय कलाओं और आधुनिक नाटकों के मंचन के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया स्टेज।
- वातानुकूलित परिसर: हर मौसम में कार्यक्रमों के आनंद को निर्बाध रखने के लिए पूर्णतः एयर-कंडीशन्ड हॉल।
कुरुद की सांस्कृतिक अस्मिता और सुनहरे भविष्य का मार्ग
इस ऑडिटोरियम के निर्माण से कुरुद नगर पालिका के विकास को एक नई वैचारिक दिशा मिलेगी। स्थानीय लोक कलाकारों, जिन्हें अब तक बड़े आयोजनों के लिए रायपुर या अन्य शहरों की ओर देखना पड़ता था, उन्हें अब अपने ही घर में एक प्रतिष्ठित मंच प्राप्त होगा। यह कदम नगर की सांस्कृतिक विरासत को संजोने के साथ-साथ यहां के सामाजिक गौरव को भी बढ़ाएगा। प्रदेश की विष्णुदेव की सरकार और कुरुद विधायक अजय चंद्राकर की इस सार्थक सोच ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब राजनीति जन-संस्कृति से जुड़ती है, तो विकास की परिभाषा और भी सुंदर हो जाती है। कुरुद अब केवल सड़कों का शहर नहीं, बल्कि कला और संवाद का आधुनिक केंद्र बनकर उभरेगा।



