
छत्तीसगढ़ के सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के डीएड (D.Ed.) अभ्यर्थियों के लिए 11 फरवरी का दिन बेहद निर्णायक साबित हो सकता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में इन अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर अहम फैसला आने की संभावना है। पिछले 47 दिनों से अपनी मांगों को लेकर आमरण अनशन पर बैठे युवाओं को स्कूल शिक्षा मंत्री से हुई चर्चा के बाद यह उम्मीद बंधी है कि सरकार जल्द ही भर्ती की छठी (6वीं) सूची जारी करने पर मुहर लगा सकती है।
2300 रिक्त पदों पर अटकी है भर्ती
आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रदेश में सहायक शिक्षकों के लगभग 2300 पद अब भी रिक्त हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 2621 बीएड डिग्रीधारियों को इस पद से बाहर कर दिया गया था, जिसके बाद उनके स्थान पर मेरिट के आधार पर डीएड योग्य उम्मीदवारों को नियुक्ति दी जानी थी। उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अब तक शासन स्तर पर आवश्यक कार्यवाही न होने से हजारों योग्य युवा अधर में लटके हुए हैं।
अनशनकारियों की बिगड़ती सेहत और मजबूरी
अपनी जायज मांगों के लिए कड़ाके की ठंड और विपरीत परिस्थितियों में 47 दिनों से अनशन कर रहे अभ्यर्थियों की हालत अब चिंताजनक होती जा रही है। रविवार को पांच प्रदर्शनकारियों की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें आनन-फानन में अस्पताल रेफर करना पड़ा। अभ्यर्थियों का दर्द है कि वे लंबे समय से मानसिक, आर्थिक और सामाजिक संकट झेल रहे हैं। शिक्षा मंत्री ने साफ किया है कि अब अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री की सहमति के बाद कैबिनेट में ही लिया जाएगा।
महानदी भवन में जुटेगी विष्णुदेव साय की टीम
राज्य सरकार की यह महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक बुधवार सुबह 11 बजे नवा रायपुर के महानदी भवन में आयोजित होगी। बैठक के एजेंडे में सहायक शिक्षक भर्ती-2023 का मुद्दा शीर्ष पर रहने की चर्चा है। प्रशासन पर कोर्ट के आदेशों का पालन करने और बेरोजगारों को राहत देने का भारी दबाव है। यदि कैबिनेट में वित्तीय और प्रशासनिक मंजूरी मिल जाती है, तो लंबे समय से चल रहा यह गतिरोध समाप्त हो सकता है और खाली पड़े स्कूलों को नए शिक्षक मिल सकते हैं।
अदालती आदेश और शासन की तैयारी
गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य शासन को डीएड अभ्यर्थियों के हक में आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। शासन अब इस कानूनी पेच को सुलझाने और रिक्त पदों को भरने के लिए कैबिनेट की ढाल का उपयोग करना चाहता है। अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि सरकार केवल आश्वासन देने के बजाय इस बार लिखित आदेश या नई चयन सूची की समय-सीमा तय करेगी। 11 फरवरी की दोपहर तक यह स्पष्ट हो जाएगा कि अनशन पर बैठे युवाओं का संघर्ष सफलता के द्वार तक पहुंचा है या नहीं।



