
रायपुर: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (National Commission for Scheduled Tribes – NCST) ने कोरबा जिले में फर्जी कंपनी फ्लोरामेक्स द्वारा आदिवासी महिलाओं से की गई ठगी के मामले में सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने इस गंभीर प्रकरण की केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की अनुशंसा की है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
मुख्य सचिव को पत्र लिखकर 30 दिन में मांगी रिपोर्ट
आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि फ्लोरामेक्स कंपनी द्वारा किए गए इस कथित घोटाले की केंद्रीय एजेंसी से जाँच कराई जाए। साथ ही, आयोग ने 30 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट आयोग को प्रस्तुत करने का सख्त आदेश दिया है।
पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर की शिकायत पर हुई सुनवाई
यह मामला पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर की शिकायत के बाद सामने आया है।
- सुनवाई में उपस्थिति: आयोग ने 16 अक्टूबर को इस मामले की सुनवाई की थी, जिसमें राज्य सरकार की तरफ से बिलासपुर कमिश्नर सुनील कुमार जैन उपस्थित हुए थे।
- शिकायत का सार: कंवर ने अपनी शिकायत में कहा था कि फ्लोरामेक्स कंपनी ने कोरबा जिले की 40 हजार से अधिक आजीविका मिशन से जुड़े आदिवासी महिला समूहों के साथ ठगी कर अरबों रुपये का घोटाला किया है। उन्होंने पीड़ितों को राहत दिलाने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के लिए केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने का आग्रह किया था।
गंभीर वित्तीय अनियमितता और एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई का सुझाव
आयोग ने अपनी जांच के बाद पाया कि यह मामला गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और अनुसूचित जनजाति समुदाय की महिलाओं के आर्थिक शोषण से जुड़ा है।
- अत्याचार निवारण अधिनियम: आयोग ने सुझाव दिया है कि मामले की एफआईआर और न्यायालय में प्रस्तुत चालान में अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर प्रकरण का समयबद्ध निपटारा किया जाए।
- उच्चस्तरीय जांच: आयोग ने कहा है कि प्रथम दृष्टया यह मामला बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और जालसाजी का है, जिसकी जांच उच्चस्तरीय अधिकारियों द्वारा की जानी चाहिए ताकि आदिवासी महिलाओं को उनकी लूटी गई रकम शीघ्र वापस मिल सके।
संपत्ति राजसात करने और वसूली के आदेश
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि संबंधित कंपनी के अधिकारियों-कर्मचारियों की सभी चल-अचल और बेनामी संपत्तियों तथा बैंक खातों का पता लगाकर उन्हें राजसात कर वसूली की जाए। इन सभी कार्रवाई की जानकारी 30 दिनों के भीतर आयोग को उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं।
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