VIDEO: बेबसी की इंतहा: सरगुजा में 4 दिव्यांगों वाले परिवार ने मांगी इच्छा मृत्यु, सरकारी जमीन से बेदखली का है खौफ

अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां के बटईकेला गांव में रहने वाले एक अत्यंत गरीब और दिव्यांग परिवार ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर ‘इच्छा मृत्यु’ की गुहार लगाई है। परिवार का आरोप है कि वे पिछले 70 वर्षों से जिस शासकीय भूमि पर काबिज हैं और खेती कर अपना पेट पाल रहे हैं, प्रशासन अब उन्हें वहां से जबरन बेदखल करने की कोशिश कर रहा है। भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना से टूटकर परिवार के सदस्य कलेक्टोरेट पहुंचे और अपनी पीड़ा बयां की। उनका कहना है कि सहारा छिन जाने के बाद उनके पास मरने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।

4 दिव्यांग और 12 लोगों का पेट: एक जमीन के भरोसे टिका है पूरा कुनबा

सीतापुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बटईकेला का यह परिवार सामाजिक और शारीरिक चुनौतियों से जूझ रहा है। 12 सदस्यों वाले इस परिवार में चार लोग गंभीर रूप से दिव्यांग हैं। इनमें 18 साल का राहुल और 16 साल की प्रिंशी पूरी तरह दृष्टिहीन हैं, जबकि शांति चौहान शारीरिक दिव्यांग और फिरन सिंह मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं। परिवार का गुजारा खसरा नंबर 1784 की एक एकड़ जमीन पर होने वाली खेती से ही चलता है। परिवार का कहना है कि इसी भूमि पर बिना किसी ग्रामसभा की अनुमति या पूर्व सूचना के आंगनबाड़ी भवन की नींव डाल दी गई है, जिससे उनकी रोजी-रोटी का इकलौता जरिया खत्म हो रहा है।

भेदभाव का आरोप: रसूखदारों पर मेहरबानी और गरीबों पर कार्रवाई

पीड़ित परिवार का गुस्सा इस बात पर भी है कि उसी शासकीय भूमि पर कुछ प्रभावशाली लोगों का भी कब्जा है, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। आरोप है कि पंचायत के सरपंच और सचिव केवल इस लाचार परिवार को निशाना बना रहे हैं। परिवार का दावा है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और उसके ठेकेदार पति ने अपनी निजी सुविधा के लिए जानबूझकर इसी जमीन का चयन किया है ताकि भवन उनके घर के करीब बन सके। इस कथित भेदभाव ने परिवार को इतना आहत किया है कि उन्होंने न्याय की उम्मीद छोड़ दी है।

भुखमरी की दहलीज पर खड़ा परिवार: इलाज और राशन का संकट

दिव्यांग सदस्यों के इलाज और भरण-पोषण के लिए यह परिवार पूरी तरह अपनी कृषि भूमि पर निर्भर है। केवला बाई और उनके परिजनों का कहना है कि यदि यह जमीन उनके हाथ से निकल गई, तो दिव्यांग बच्चों की देखभाल और भोजन का संकट खड़ा हो जाएगा। वैकल्पिक व्यवस्था के अभाव में वे खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। इसी मानसिक तनाव और बेबसी के चलते उन्होंने राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की मांग की है, ताकि उन्हें तिल-तिल कर मरने की पीड़ा से मुक्ति मिल सके।

प्रशासन की ओर से जांच का आश्वासन: फिलहाल निर्माण कार्य पर रोक

मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ है। डिप्टी कलेक्टर रामराज सिंह ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि फिलहाल आंगनबाड़ी का निर्माण कार्य रोक दिया गया है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग के माध्यम से जमीन के रिकॉर्ड की जांच होगी और परिवार के साथ न्याय किया जाएगा। फिलहाल इस आश्वासन के बाद परिवार थोड़ा शांत है, लेकिन उनके मन में अब भी बेघर होने का डर बना हुआ है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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