दूध-दही में मिलावट के बाद अब शराब भी Pure नहीं… दारू पीने के बाद फेंकी गई बोतलों को बटोरकर ऐसे होती थी मिलावट

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जिस शराब को लोग अपनी मर्जी से खरीदते और पीते हैं, अब वो भी शुद्ध नहीं रही। दूध-दही और पनीर में मिलावट की खबरों के बाद अब शराब में मिलावट का घिनौना खेल उजागर हुआ है। ये खेल किसी लोकल ठेले पर नहीं, बल्कि सरकारी दारू दुकान में चल रहा था — और वो भी राजधानी रायपुर के न्यू राजेंद्र नगर इलाके में।

फेंकी गई खाली बोतलों से रिफिलिंग का गोरखधंधा

ये मामला लालपुर स्थित सरकारी शराब दुकान का है। यहां शराब पीने के बाद ग्राहक जो बोतलें फेंक देते थे, उन्हें दुकान का स्टाफ बटोर लेता था। बाद में उन्हीं बोतलों में कम पसंदीदा ब्रांड की शराब डालकर, लोकप्रिय ब्रांड्स जैसे गोवा और जम्मू स्पेशल की लेबलिंग और पैकिंग कर दी जाती थी।

खास बात ये थी कि इन मिलावटी बोतलों में अक्सर पानी भी मिलाया जाता था, जिससे मुनाफा और बढ़ाया जा सके। यानी ग्राहकों को नकली और हल्की शराब परोसी जा रही थी — वो भी असली दामों में।

उड़नदस्ते की रेड, 299 पेटियां मिलावटी शराब बरामद

राज्य स्तरीय और संभागीय आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने इस दुकान पर छापा मारा और 299 पेटियां मिलावटी शराब बरामद की।

इनमें से:

  • 95 पेटी कैप्टन क्लब व्हिस्की
  • 59 पेटी सिंडिकेट व्हिस्की
  • 86 पेटी जम्मू स्पेशल
  • 25 पेटी गोवा स्पेशल
  • और 34 पेटी बिना होलोग्राम वाली शराब की थीं।

इससे यह भी साफ हुआ कि शराब को दोबारा भरते समय सीलिंग ठीक से नहीं की जा रही थी, जिससे बिना ढक्कन खोले ही बोतल से लिकेज हो रही थी।

स्टॉक में भी 12 लाख का घोटाला

छापेमारी के दौरान जब दुकान के स्टॉक और अकाउंट का मिलान किया गया, तो पाया गया कि कैश और स्टॉक में 12 लाख 10 हजार 480 रुपए की गड़बड़ी है। यानी मिलावट के साथ-साथ आर्थिक घोटाला भी चल रहा था।

आरोपियों की हुई गिरफ्तारी, दो अभी भी फरार

इस मामले में आबकारी विभाग ने:

  • मनीष रामटेके
  • श्याम किशोर साहू
  • युवराज मधुकर

को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि शेखर बंजारे और सागर सोनवानी अब भी फरार हैं।

इन सभी के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) और 59(क) के तहत केस दर्ज किया गया है।

जनता की सेहत से खिलवाड़ और भरोसे की तिजोरी पर हाथ!

शराब वैसे भी सेहत के लिए नुकसानदायक है, लेकिन जब उसमें मिलावट का ज़हर मिला दिया जाए तो बात और भी गंभीर हो जाती है। सरकार खुद दारू बेचती है, ऐसे में अगर सरकारी दुकानों में ही मिलावट होने लगे तो सवाल सीधे सिस्टम पर उठते हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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