
Ahmedabad Plane Crash News: 12 जून को हुए अहमदाबाद विमान हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस भीषण हादसे में 270 से ज़्यादा लोगों की जान चली गई, जिनमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी शामिल थे। इसी हादसे में चमत्कारिक रूप से बचे ब्रिटिश नागरिक विश्वास रमेश का दर्द आज उस वक्त छलक पड़ा, जब उन्होंने अपने भाई के पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई दी।
Vishwas Ramesh New Video: अहमदाबाद में अपने भाई की शवयात्रा के दौरान विश्वास बिलख-बिलख कर रोते नजर आए। हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए विश्वास खुद तो किसी तरह बच निकले, लेकिन उनका भाई ज़िंदगी की जंग हार गया। इस पल ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया।

“मुझे लगा मैं मरने वाला हूं… पर चमत्कार से बच गया”
हादसे के बाद दिए गए एक साक्षात्कार में लीसेस्टर (ब्रिटेन) निवासी विश्वास रमेश ने कहा कि उन्हें आज भी भरोसा नहीं होता कि वे इस हादसे में कैसे बच गए। उन्होंने बताया कि विमान ने अहमदाबाद से गैटविक के लिए उड़ान भरते ही अचानक रफ्तार खो दी और कुछ ही सेकंड में हादसा हो गया।
“मुझे ऐसा लगा कि मेरी आंखों के सामने ही सब खत्म हो गया। एयरहोस्टेस, अंकल-आंटियां सब की मौत हो गई। मुझे लगा कि अब मेरा अंत आ गया है। लेकिन जब आंखें खुलीं, तो मैं सीट पर था, बेल्ट खोली और बाहर निकल आया,” – रमेश ने बताया।
हादसे के दौरान जल रहीं थीं हरी और सफेद लाइट्स, फिर हुआ टकराव
रमेश ने कहा कि हादसे के वक्त ऐसा महसूस हुआ जैसे विमान अपनी पूरी ताकत से दौड़ रहा हो और अचानक किसी इमारत से टकरा गया। “हरी और सफेद लाइट्स जल रही थीं। ऐसा लग रहा था जैसे कोई रेस शुरू हो गई हो, और अगले ही पल सब कुछ खत्म हो गया।”

पीएम मोदी ने अस्पताल में जाकर पूछी कुशलक्षेम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अहमदाबाद सिविल अस्पताल में विश्वास रमेश से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने रमेश का हालचाल जाना और ढांढस बंधाया। हादसे से उबर रहे रमेश ने बताया कि पीएम की मौजूदगी से उन्हें थोड़ी हिम्मत मिली, लेकिन अपनों को खोने का दुख अभी भी दिल से गया नहीं।
हादसा जिसने देश को हिला दिया
अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरते ही हुए इस विमान हादसे में 270 से ज़्यादा लोग मारे गए। अब तक के सबसे बड़े हवाई हादसों में से एक माने जा रहे इस दुर्घटना ने देश को स्तब्ध कर दिया है। हादसे में बचे चंद लोगों की कहानियां आज भी उस खौफनाक मंजर की गवाही देती हैं।
विश्वास रमेश जैसे चंद लोग ही हैं जो इस भयावह हादसे से जिंदा बाहर निकल पाए। लेकिन अपनों को खोने का जो घाव है, वो शायद ही कभी भर पाए। इस हादसे ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि ज़िंदगी कितनी नाजुक है, और हर सांस एक चमत्कार है।



