
धमतरी जिले के किसानों को आधुनिक खेती और नई तकनीकों से रूबरू कराने के लिए जिला प्रशासन ने एक खास पहल की है। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित एक विशेष कार्यशाला में अमेरिका की वर्जिनिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. अभिलाष चंदेल ने शिरकत की। उन्होंने स्थानीय किसानों और कृषि विभाग के अधिकारियों को खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल के तरीके बताए। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेती को वैज्ञानिक आधार देना और किसानों की आय में बढ़ोतरी करना है। डॉ. चंदेल ने विस्तार से समझाया कि कैसे डेटा और तकनीक मिलकर खेती के भविष्य को उज्ज्वल बना सकते हैं।
प्रीसिजन फार्मिंग से कम होगी लागत और बढ़ेगा फसल उत्पादन
डॉक्टर चंदेल ने किसानों को ‘सटीक खेती’ की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस पद्धति में ड्रोन, सेंसर और सैटेलाइट से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण किया जाता है जिससे खेत के उस हिस्से की पहचान हो पाती है जिसे पानी या खाद की जरूरत है। इससे पूरे खेत में अंधाधुंध कीटनाशक छिड़कने की जरूरत नहीं पड़ती और उर्वरकों की सही मात्रा का ही उपयोग होता है। तकनीक के इस मेल से न केवल खेती की लागत में कमी आती है बल्कि पैदावार की गुणवत्ता भी पहले से काफी बेहतर हो जाती है।
स्मार्ट मशीनों और सॉफ्टवेयर के जरिए होगी मिट्टी की निगरानी
प्रोफेसर ने कार्यशाला में बताया कि आने वाले समय में जीपीएस आधारित स्मार्ट मशीनें और आधुनिक सॉफ्टवेयर किसानों के सबसे बड़े मददगार साबित होंगे। सेंसर आधारित डेटा संग्रह के जरिए किसान अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर ही मिट्टी की नमी और पोषक तत्वों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने जीआईएस तकनीक के बारे में भी बताया जो खेत के नक्शे के आधार पर यह तय करती है कि किस फसल के लिए कौन सा समय सबसे अनुकूल है। इस दौरान डॉ. चंदेल ने किसानों के मन में उठ रहे कई सवालों और शंकाओं का बहुत ही सरल भाषा में समाधान किया।
पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि पर प्रशासन का जोर
धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने डॉ. चंदेल का परिचय देते हुए कहा कि आज के दौर में नवाचार और वैज्ञानिक सोच के बिना खेती को लाभकारी बनाना मुश्किल है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई और आधुनिक तकनीकें न केवल उत्पादन बढ़ाएंगी बल्कि जल संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी सहायक होंगी। रसायनों के संतुलित उपयोग से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा। शासन की मंशा है कि ड्रोन और डेटा आधारित निर्णय लेने की यह प्रणाली जिले के आखिरी किसान तक पहुंचे ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
आत्मनिर्भर किसान और भविष्य की समृद्ध खेती की ओर कदम
धमतरी के प्रगतिशील किसानों और कृषि अधिकारियों ने इस सत्र को खेती की दिशा बदलने वाला बताया। कार्यशाला में मौजूद विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान इन आधुनिक उपकरणों और डेटा विश्लेषण को अपनाते हैं तो वे जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना बेहतर तरीके से कर पाएंगे। जिला प्रशासन की इस पहल से धमतरी में समृद्ध और टिकाऊ खेती के नए रास्ते खुल रहे हैं। तकनीक से लैस होकर किसान न केवल अपनी मेहनत बचा पाएंगे बल्कि बाजार की मांग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण उत्पादन कर अपनी आर्थिक स्थिति को और भी मजबूत कर सकेंगे।
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