
छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था अब पारंपरिक ब्लैकबोर्ड से आगे बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में प्रवेश करने जा रही है। प्रदेश के स्कूलों में एआई आधारित शिक्षा को लागू करने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने कमर कस ली है। इस पहल के तहत शासकीय संस्थानों के प्राचार्यों, शिक्षकों और छात्रों को एआई की बेसिक ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य अध्ययन, अध्यापन और शोध कार्यों की गुणवत्ता में सुधार करना और छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है।
दो चरणों में पूरा होगा प्रशिक्षण का खाका
एससीईआरटी ने इस प्रशिक्षण अभियान को व्यवस्थित तरीके से चलाने की योजना बनाई है। पहले चरण में एससीईआरटी के प्राध्यापकों, सरकारी बीएड कॉलेजों और डाइट (DIET) संस्थानों के अकादमिक सदस्यों को एआई का बेसिक कोर्स सफलतापूर्वक कराया जा चुका है। अब दूसरे चरण में इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है, जिसमें स्कूलों के हजारों शिक्षकों को इस तकनीक से परिचित कराया जाएगा ताकि वे क्लासरूम में इसका प्रभावी उपयोग कर सकें।
कक्षा 3 से ही शुरू होगी एआई की पढ़ाई
नई शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप, तकनीकी शिक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम के शुरुआती स्तर से ही जोड़ने की कवायद तेज हो गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ‘भारत बोधन एआई कॉन्क्लेव-2026’ में संकेत दिया है कि आने वाले समय में कक्षा तीसरी से ही एआई आधारित शिक्षा शुरू की जाएगी। सरकार का मानना है कि तकनीक अब शिक्षा तंत्र का आधार बन चुकी है, इसलिए बच्चों को कम उम्र से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों के बारे में बताना समय की मांग है।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से मिलेगा बढ़ावा
छत्तीसगढ़ सरकार शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना कर रही है। इस केंद्र का उद्देश्य न केवल छात्रों की बौद्धिक क्षमता बढ़ाना है, बल्कि शिक्षकों को भी शोध और मूल्यांकन के नए तरीके सिखाना है। एआई के माध्यम से प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता आएगी और छात्रों के प्रदर्शन का सटीक मूल्यांकन करना आसान हो जाएगा। यह पहल राज्य के शिक्षा ढांचे को आधुनिक और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
निजी स्कूल के शिक्षकों को भी मिलेगा मौका
यह डिजिटल मिशन केवल सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगा। एससीईआरटी की इस योजना में निजी, अनुदान प्राप्त और गैर-अनुदान प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों को भी शामिल किया जाएगा। आंकड़ों के अनुसार, राज्य में करीब 1.75 लाख सरकारी शिक्षक हैं, जबकि निजी क्षेत्रों को मिलाकर यह संख्या ढाई लाख तक पहुंचती है। नई पाठ्यचर्या (Curriculum) को अपडेट करने के साथ-साथ इन सभी शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए एक विशेष रूपरेखा तैयार की गई है।
साइबर ठगी से बचाव और डिजिटल सुरक्षा
एआई की ट्रेनिंग के साथ-साथ डिजिटल सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। अक्सर इंटरनेट और नई तकनीक के इस्तेमाल के साथ साइबर खतरों का जोखिम बढ़ जाता है। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों और विद्यार्थियों को सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार, अज्ञात लिंक से बचने और साइबर ठगी से सुरक्षा के तरीके सिखाए जाएंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षा के साथ तकनीक का इस्तेमाल ही शिक्षा में वास्तविक सुधार ला सकता है।
भविष्य की राह और शिक्षण में पारदर्शिता
एआई आधारित शिक्षा लागू होने से छत्तीसगढ़ के स्कूलों में शिक्षण गुणवत्ता, शोध और मूल्यांकन की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और दक्ष हो जाएगी। शिक्षकों को पाठ योजना तैयार करने और छात्रों की व्यक्तिगत जरूरतों को समझने में एआई टूल्स से बड़ी मदद मिलेगी। यह बदलाव न केवल छात्रों के लिए सीखने की प्रक्रिया को रोचक बनाएगा, बल्कि छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी डिजिटल साक्षर राज्यों की कतार में भी लाकर खड़ा करेगा।



