
छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में पदोन्नति को लेकर मचे घमासान के बीच एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने मोर्चा खोल दिया है। 2012 बैच के आईपीएस और कवर्धा एसपी धर्मेंद्र सिंह छवई ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर अपने साथ हुए कथित अन्याय और भेदभाव की शिकायत की है। अधिकारी का कहना है कि योग्यता और नियमों के बावजूद उन्हें जानबूझकर प्रमोशन से वंचित रखा जा रहा है। इस पत्र ने विभाग के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान और चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच का हवाला देकर रोका गया रास्ता
एसपी धर्मेंद्र सिंह छवई ने अपनी शिकायत में बताया है कि साल 2024 और 2025 में जारी हुई कई प्रमोशन सूचियों में उनके नाम पर विचार तो हुआ, लेकिन उन्हें पदोन्नति नहीं मिली। इसका कारण भोपाल लोकायुक्त में लंबित एक पुरानी जांच को बताया गया है। अधिकारी का तर्क है कि उनके खिलाफ न तो कोई चार्जशीट दाखिल हुई है और न ही कोई विभागीय कार्यवाही चल रही है। ऐसे में महज एक जांच के नाम पर उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों से दूर रखना नियम विरुद्ध है।

दागी चेहरों को प्रमोशन मिलने पर उठाए सवाल
आईपीएस छवई ने अपने पत्र में विभाग के दोहरे मापदंडों पर भी प्रहार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग के कुछ ऐसे अधिकारियों को प्रमोशन का लाभ दे दिया गया है, जिन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर मामले दर्ज हैं। उन्होंने लिखा है कि जिनके खिलाफ कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट तक नहीं आई है, वे पदोन्नत हो गए, जबकि उनके मामले में स्थिति कहीं ज्यादा साफ होने के बावजूद उन्हें उप पुलिस महानिरीक्षक (DIG) बनने से रोका जा रहा है।
गृह मंत्रालय के नियमों की दी गई दलील
अधिकारी ने भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा 15 जनवरी 1999 को जारी किए गए पदोन्नति नियमों का हवाला दिया है। इन नियमों के मुताबिक, यदि कोई अधिकारी निलंबित नहीं है, उसके खिलाफ आरोप पत्र जारी नहीं हुआ है और कोर्ट में कोई आपराधिक केस लंबित नहीं है, तो उसे प्रमोशन देने से मना नहीं किया जा सकता। एसपी छवई का कहना है कि वे इन सभी शर्तों को पूरा करते हैं, फिर भी उनके साथ अनुच्छेद-16 के तहत मिलने वाले ‘समान अवसर के अधिकार’ का उल्लंघन किया जा रहा है।
संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन की पीड़ा
पत्र के अंत में पुलिस अधीक्षक ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि इस भेदभाव से उनका और उनके जैसे कई कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों का मनोबल टूट रहा है। उन्होंने इसे समानता के अधिकार पर सीधा प्रहार बताया है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय इस पत्र पर क्या रुख अपनाता है और क्या विभाग अपनी पदोन्नति प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए कोई कदम उठाता है। यह मामला आने वाले दिनों में पुलिस महकमे के भीतर बड़ी चर्चा का विषय बन सकता है।
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