
Chhattisgarh Kranti Sena: छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रमुख अमित बघेल बुधवार को रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा हो गए। बलौदाबाजार में हुए उग्र प्रदर्शन और तोड़फोड़ के मामले में वे पिछले कई महीनों से जेल में बंद थे। उनकी रिहाई की खबर मिलते ही रायपुर सेंट्रल जेल के बाहर सुबह से ही सैकड़ों समर्थकों और कार्यकर्ताओं का जमावड़ा शुरू हो गया था। जेल के दरवाजे से बाहर आते ही समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया और जमकर आतिशबाजी की।
जेल परिसर से घड़ी चौक तक निकाली गई भव्य स्वागत रैली
अमित बघेल की रिहाई के बाद क्रांति सेना के पदाधिकारियों और समर्थकों ने शक्ति प्रदर्शन किया। सेंट्रल जेल परिसर से लेकर राजधानी के प्रसिद्ध घड़ी चौक तक एक बड़ी स्वागत रैली निकाली गई। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और ढोल-नगाड़ों के साथ अपनी खुशी जताई। रैली में छत्तीसगढ़ क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और जमीनी कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस बल भी तैनात रहा।

सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत, तीन महीने रायपुर जिले में प्रवेश पर रोक
अमित बघेल को बलौदाबाजार हिंसा मामले में बीते 17 जुलाई को उच्चतम न्यायालय से सशर्त जमानत मिली थी। जमानत की कानूनी प्रक्रिया और कागजी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें बुधवार को जेल से रिहा किया गया। अदालत ने जमानत देने के साथ ही कुछ सख्त शर्तें भी लागू की हैं। इन शर्तों के अनुसार, अमित बघेल को अगले तीन महीनों तक रायपुर जिले की सीमा से बाहर रहना होगा और जांच प्रक्रिया में सहयोग देना होगा।

क्या था पूरा बलौदाबाजार हिंसा मामला?
यह पूरा विवाद 10 जून 2024 को बलौदाबाजार के दशहरा मैदान में आयोजित एक बड़े विरोध प्रदर्शन से शुरू हुआ था। सतनामी समाज के धार्मिक स्थल गिरौदपुरी के जैतखाम में हुई तोड़फोड़ के विरोध में हजारों लोग एकत्र हुए थे। आरोप है कि इस दौरान मंच से दिए गए भाषणों के बाद भीड़ उग्र हो गई। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए संयुक्त कलेक्टोरेट और पुलिस अधीक्षक कार्यालय परिसर में प्रवेश कर भारी तोड़फोड़ की थी।

कलेक्टोरेट में आगजनी और दर्जनों गाड़ियों को किया गया था आग के हवाले
उग्र हुई भीड़ ने कलेक्टोरेट परिसर में खड़ी सैकड़ों मोटरसाइकिल और चार पहिया वाहनों में आग लगा दी थी। इसके साथ ही कलेक्टोरेट भवन के कुछ हिस्सों को भी नुकसान पहुंचाया गया था। स्थिति को नियंत्रित करने पहुंचे पुलिसकर्मियों और शासकीय कर्मचारियों पर लाठी, डंडों और पत्थरों से हमला किया गया था, जिसमें कई सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस मामले में पुलिस ने अमित बघेल समेत कई प्रमुख नेताओं के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था।
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