
छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रमुख अमित बघेल ने एक इंटरव्यू में ऐलान किया है कि वह 5 दिसंबर को खुद ही गिरफ्तारी देंगे। बघेल, जिन पर देशभर में 12 एफआईआर दर्ज हैं और जिनका पता बताने पर पुलिस ने 5 हजार रुपये का इनाम रखा है, ने दावा किया कि वह गिरफ्तारी से डरते नहीं हैं और फरार नहीं हुए हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ पुलिस को कहा कि वे उन्हें ढूंढ़ने में पेट्रोल और डीजल खर्च न करें। बघेल ने व्यंग्य करते हुए कहा कि वह किसी गरीब व्यक्ति को अपना पता बताकर उसे यह इनाम पाने का मौका देंगे, जिससे उसका भला हो सके।
हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका: आपराधिक जांच में हस्तक्षेप से इनकार
अमित बघेल की गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। हालांकि, कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद इस याचिका को खारिज कर दिया। डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि आपराधिक जांच में हस्तक्षेप करना उचित नहीं है और न ही किसी आरोपी की गिरफ्तारी के लिए निर्देश दिए जा सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि जांच के तरीके या सीनियर अफसर की निगरानी जैसे निर्देश देना आपराधिक जांच के माइक्रो लेवल पर मैनेजमेंट जैसा होगा, जो कोर्ट के दायरे में नहीं आता है। अमित बघेल के तलाश में पुलिस उनके परिचितों के घर छापा मारा चुकी है, कई टीमें राज्य के अलग-अलग स्थानों पर तलाश में जुटी
सरकार पर सीधा हमला: हसदेव और रामगढ़ पहाड़ी का मुद्दा
अमित बघेल ने राज्य की सरकार की मनमानी को लेकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस सरकार में सभी वर्ग परेशान हैं और केवल उद्योगपति ही खुश हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही सरकारों ने हसदेव के जंगल को उद्योगपतियों को बेचा है और लाखों पेड़ काटे जा रहे हैं। बघेल ने लोगों से हसदेव के जंगल को बचाने के लिए आगे आकर आंदोलन करने और छत्तीसगढ़ की अस्मिता को बचाने की अपील की।
सरगुजा की रामगढ़ पहाड़ी खतरे में: कोयला ब्लास्टिंग पर चिंता
बघेल ने कोयला खनन के कारण पर्यावरण और ऐतिहासिक स्थलों को होने वाले खतरे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सरगुजा जिले की रामगढ़ की पहाड़ी खतरे में है, जहां मान्यता है कि भगवान राम ने अपने वनवास काल के दौरान विश्राम किया था। इस पहाड़ी के पास की कोयला खदानों में होने वाली ब्लास्टिंग से कंपन होता है, जिससे चट्टानों में दरारें आ गई हैं और भू-स्खलन का खतरा बढ़ गया है। इसी पहाड़ी पर महाकवि कालिदास ने मेघदूतम् की रचना की थी, और सीताबेंगरा और जोगीमारा की गुफाएं भी यहीं स्थित हैं।
बिजली बिल पर सवाल: ‘हमारा कोयला पर महंगा बिल क्यों?’
बघेल ने सरकार को बिजली बिल के मुद्दे पर भी घेरा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब छत्तीसगढ़ का कोयला और संसाधन हमारा है, तो छत्तीसगढ़ियों को ही महंगे दाम में बिजली का बिल क्यों मिल रहा है। उन्होंने कहा कि आम जनता पर बिजली के बिल की मार भारी है और आखिर कब छत्तीसगढ़ियों को उनका मौलिक अधिकार और हक मिलेगा। उन्होंने राज्य के संसाधनों के गैर-लाभकारी उपयोग पर सवाल उठाया।
विवाद की जड़: छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति से तोड़फोड़ और धार्मिक टिप्पणी
यह सारा विवाद छत्तीसगढ़ राज्य के स्थापना दिवस के समय शुरू हुआ था, जब राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़ने का मामला सामने आया था। इसके बाद अमित बघेल ने इस मुद्दे पर श्यामा प्रसाद मुखर्जी, अग्रसेन महाराज और सिंधी समाज के ईष्ट देवता झूलेलाल जी पर कथित तौर पर विवादित टिप्पणी की थी। उनके बयान के बाद अग्रवाल समाज और सिंधी समाज ने प्रदेशभर और देशभर में प्रदर्शन किया, जिसके फलस्वरूप उनके खिलाफ कई राज्यों में एफआईआर दर्ज हुईं।
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कब लगी थी छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति
रायपुर के तेलीबांधा तालाब के पास स्थित छत्तीसगढ़ महतारी उद्यान में छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा लगाई गई थी, जिसका अनावरण 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया था। इसके बाद राज्य के सभी जिलों में छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्तियां लगाई गई थीं, जिसे लेकर यह विवाद सामने आया था।
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