अमित जोगी का ‘खटिया खड़ी आंदोलन’: कल कोरबा कूच करेंगे जेसीसीजे अध्यक्ष, डटकर करेंगे मुकाबला, जानें क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ की राजनीति में अपने आक्रामक तेवरों के लिए पहचाने जाने वाले जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने अब उद्योग नगरी कोरबा में मोर्चा खोल दिया है। बालको (BALCO) प्रबंधन की कथित कर्मचारी और मजदूर विरोधी नीतियों के विरोध में जोगी ने ‘खटिया खड़ी आंदोलन’ की घोषणा की है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए उन्होंने बताया कि 13 मार्च को वे कोरबा पहुंचेंगे और श्रमिकों के हक की लड़ाई को धार देंगे। जोगी के इस एलान के बाद स्थानीय प्रशासन और बालको प्रबंधन की धड़कनें बढ़ गई हैं।

मजदूरों का नेतृत्व और जोगी का साथ: अधिकारों की अंतिम लड़ाई

अमित जोगी ने अपने संदेश में साफ किया कि यह विरोध प्रदर्शन किसी चुनावी लाभ के लिए नहीं, बल्कि उन मजदूरों के लिए है जिनका शोषण हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन का चेहरा खुद बालको के कर्मचारी और मजदूर होंगे, वे केवल उनके पीछे एक ढाल बनकर खड़े रहेंगे। जोगी का आरोप है कि प्रबंधन लंबे समय से स्थानीय मजदूरों की अनदेखी कर रहा है और उनकी मांगों को अनसुना किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अब न्याय मिलने तक पीछे हटने का सवाल ही पैदा नहीं होता।

“डटकर करेंगे मुकाबला”: बालको प्रबंधन को जोगी की सीधी चेतावनी

अपने वीडियो संदेश में जोगी ने बालको प्रबंधन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यदि अन्यायपूर्ण नीतियां नहीं बदली गईं, तो इस बार का आंदोलन पहले के मुकाबलों से कहीं ज्यादा मजबूत और व्यापक होगा। उन्होंने “खटिया खड़ी” करने मुहावरे का इस्तेमाल करते हुए संकेत दिया कि प्रबंधन को अब जवाब देना ही होगा। जोगी ने कोरबा के नागरिकों और श्रमिकों से अपील की है कि वे अपनी आवाज बुलंद करने के लिए बड़ी संख्या में इस आंदोलन का हिस्सा बनें ताकि पूंजीवादी ताकतों को उनकी ताकत का एहसास कराया जा सके।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन मगर समझौते की गुंजाइश नहीं: जोगी ने स्पष्ट की रणनीति

अमित जोगी ने अपनी रणनीति साझा करते हुए कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण रहेगा। वे किसी भी तरह की हिंसा या तोड़फोड़ के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि शांति का मतलब कमजोरी नहीं है। मजदूरों के मौलिक अधिकारों और उनके पारिश्रमिक से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। जोगी की टीम ने कोरबा में आंदोलन की तैयारियां पूरी कर ली हैं और कल शहर के विभिन्न हिस्सों में इसका असर दिखने की संभावना है।

स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा फिर गरमाया: कोरबा में भारी तनाव के आसार

बालको में स्थानीय युवाओं को रोजगार न मिलने और पुराने मजदूरों की छंटनी जैसे मुद्दों को लेकर कोरबा में अक्सर विवाद की स्थिति बनती रही है। जोगी के इस आंदोलन ने एक बार फिर स्थानीयता के मुद्दे को हवा दे दी है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं ताकि कल होने वाले प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े। अमित जोगी ने क्षेत्र के युवाओं से भी जुड़ने की अपील की है, जिससे यह आंदोलन केवल मजदूरों तक सीमित न रहकर एक बड़ा जन-आंदोलन बनने की दिशा में अग्रसर दिख रहा है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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