
छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट आने वाली है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने मनरेगा और स्थानीय जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर साय सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आगामी 17 मार्च को राजधानी रायपुर में कांग्रेस एक विशाल ‘विधानसभा घेराव’ प्रदर्शन करने जा रही है। प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर इस बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश में मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं की अनदेखी हो रही है और जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार मौन है। इस शक्ति प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाने की कोशिश में है।
संगठन को मिली बड़ी जिम्मेदारी: जिलों में नियुक्त हुए प्रभारी
आंदोलन को सफल बनाने के लिए कांग्रेस ने अपनी पूरी सांगठनिक ताकत झोंक दी है। पीसीसी प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, बूथ, पंचायत और वार्ड स्तर पर कमेटियों के गठन के लिए पहले से तैनात प्रभारियों को ही विधानसभा घेराव की कमान सौंपी गई है। इन प्रभारियों का मुख्य काम अपने-अपने आवंटित जिलों में कार्यकर्ताओं को लामबंद करना और रायपुर पहुंचने के लिए संसाधन जुटाना है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यह प्रदर्शन केवल एक औपचारिक घेराव नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के बीच नई ऊर्जा भरने का एक माध्यम होगा।
15 मार्च तक बैठकों का दौर: हर जिले को मिला भीड़ जुटाने का टारगेट
पीसीसी ने सभी जिला प्रभारियों को निर्देश दिया है कि वे 15 मार्च से पहले अपने-अपने जिलों में अनिवार्य रूप से बैठकें आयोजित करें। इन बैठकों में न केवल वार्ड और पंचायत कमेटियों के कामकाज की समीक्षा होगी, बल्कि विधानसभा घेराव के लिए ‘रूट मैप’ भी तैयार किया जाएगा। कांग्रेस ने इस बार जिलावार भीड़ जुटाने का एक निश्चित लक्ष्य (Target) भी तय किया है। प्रभारियों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने क्षेत्र से आने वाले कार्यकर्ताओं की संख्या और उनके आने-जाने की पूरी जानकारी प्रदेश कार्यालय को उपलब्ध कराएं, ताकि आंदोलन के दौरान समन्वय बना रहे।
मुद्दों की फेहरिस्त: मनरेगा और स्थानीय जनहित पर संग्राम
कांग्रेस के इस ‘संग्राम’ के केंद्र में मनरेगा (MNREGA) योजना है। पार्टी का दावा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों को न तो समय पर काम मिल रहा है और न ही मजदूरी का भुगतान हो रहा है। इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर प्रशासन की कथित विफलताओं और जनहित की योजनाओं में हो रही कटौती को लेकर कांग्रेस जनता के बीच जाएगी। विपक्ष का मानना है कि इन बुनियादी मुद्दों को उठाकर वे सीधे तौर पर ग्रामीण वोट बैंक से जुड़ सकेंगे, जो राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है।

राजधानी में सुरक्षा और ट्रैफिक को लेकर चुनौती
17 मार्च को होने वाले इस बड़े प्रदर्शन को देखते हुए रायपुर पुलिस और प्रशासन भी अलर्ट मोड पर आ गया है। विधानसभा घेराव के दौरान हजारों की संख्या में कार्यकर्ताओं के पहुंचने की संभावना है, जिससे ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग और सुरक्षा घेरे की तैयारी शुरू कर दी है। दूसरी ओर, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखेंगे और सरकार को जनविरोधी फैसलों पर जवाब देने के लिए मजबूर करेंगे।





