GEM खरीदी घोटाला: अटल विश्वविद्यालय की क्रय समिति पर गिरी गाज, 6 सदस्यों को नोटिस

छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में सामानों की खरीदी में हुए करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का मामला अब गहराता जा रहा है। बिलासपुर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से की गई खरीदी में भारी अनियमितताएं पाई गई हैं। जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट हुआ है कि क्रय नियमों को ताक पर रखकर शासन के धन का दुरुपयोग किया गया है। इस भ्रष्टाचार के उजागर होने के बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए विश्वविद्यालय की क्रय समिति के 6 वरिष्ठ सदस्यों को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर दिया है, जिससे पूरे शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है।

विभाग की बड़ी कार्रवाई: संदिग्ध भूमिका वाले अधिकारियों के नाम उजागर

उच्च शिक्षा विभाग की अवर सचिव फबिओला बड़ा द्वारा जारी नोटिस में विश्वविद्यालय के प्रभावशाली पदों पर बैठे सदस्यों की भूमिका को संदिग्ध माना गया है। जांच के घेरे में आए इन सदस्यों में शामिल हैं:

  • डॉ. एच.एस. होता: विभागाध्यक्ष, कंप्यूटर साइंस।
  • डॉ. डी.एस.वी. जी. कलाधर: विभागाध्यक्ष, माइक्रोबायोलॉजी।
  • यशवंत कुमार पटेल: विभागाध्यक्ष, फ़ूड प्रोसेसिंग।
  • अलेक्जेंडर कुजूर: वित्त अधिकारी, विश्वविद्यालय।
  • पूजा पांडे: सहायक प्राध्यापक, वाणिज्य।इन सभी सदस्यों से तीन दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि जवाब संतोषजनक न होने पर उनकी एक वेतन वृद्धि (Increment) असंचयी प्रभाव से रोकी जा सकती है।

दो पन्नों की शिकायत ने खोला करोड़ों के भ्रष्टाचार का कच्चा चिट्ठा

इस पूरे घोटाले का खुलासा उच्च शिक्षा सचिव को भेजी गई मात्र दो पन्नों की एक विस्तृत शिकायत के बाद हुआ। शिकायतकर्ता ने प्रमाणों के साथ बताया था कि कैसे प्रदेश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों में सामग्रियों की खरीदी बाजार दर से दो से तीन गुना अधिक कीमतों पर की जा रही है। इस शिकायत की गंभीरता को देखते हुए जब समग्र जांच शुरू की गई, तो परत दर परत गड़बड़ियां सामने आने लगीं। इसी जांच की आंच में अब तक प्रदेश के कई प्राचार्य और प्रोफेसर निलंबित किए जा चुके हैं, और अब अटल विश्वविद्यालय के अधिकारी भी इसकी जद में आ गए हैं।

निविदा नियमों की धज्जियाँ: एक ही दिन में जारी किए 26 क्रय आदेश

अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय में 15 अप्रैल 2025 को जेम पोर्टल के माध्यम से जो खरीदी की गई, उसमें नियमों का खुला उल्लंघन पाया गया है। आरोप है कि बिना किसी विधिवत निविदा प्रक्रिया के, केवल एक ही दिन में 26 क्रय आदेश (Purchase Orders) आनन-फानन में जारी कर दिए गए। ये सभी आदेश जांजगीर की तीन प्रमुख फर्मों—सागर इंडस्ट्रीज, सिंघानिया ग्रुप ऑफ़ इंडस्ट्रीज और ओशन एंटरप्राइज़ को दिए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि ये तीनों फर्में कथित तौर पर एक ही परिवार से जुड़ी हुई हैं, जिससे मिलीभगत की आशंका को और बल मिलता है।

संगठित भ्रष्टाचार का आरोप: ₹40 लाख का सामान ₹1 करोड़ में खरीदा

जांच में यह सनसनीखेज तथ्य सामने आया है कि विश्वविद्यालय ने छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियमों का उल्लंघन करते हुए राज्य शासन को करोड़ों रुपये का आर्थिक चूना लगाया है। शिकायत के अनुसार, खरीदी गई सामग्रियों का वास्तविक बाजार मूल्य 40 लाख रुपये से अधिक नहीं है, जबकि विश्वविद्यालय ने इसके लिए 1 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया है। अधिकारियों और फर्मों के बीच इस कथित सांठगांठ को एक ‘संगठित भ्रष्टाचार’ के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ गुणवत्ता और दर की पूरी तरह से अनदेखी की गई।

बंच बीड की अनदेखी: अलग-अलग सामग्रियों का ठेका एक ही फर्म को

विश्वविद्यालय की क्रय प्रक्रिया पर सबसे बड़ा सवाल यह उठाया गया है कि फर्नीचर, खेल सामग्री, कंप्यूटर, टीवी, एसी और साउंड सिस्टम जैसे अलग-अलग प्रकृति के सामानों का ठेका एक या दो विशिष्ट फर्मों को ही कैसे मिल गया? नियमों के अनुसार, इसके लिए ‘बंच बीड’ (Bunch Bid) का प्रावधान होना चाहिए था, लेकिन अधिकारियों ने कोटेशन पद्धति अपनाकर अपनी पसंदीदा फर्मों को लाभ पहुँचाया। इस अनियमितता ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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