मतदाता सूची में खेल: जिंदा व्यक्ति को मृत बताकर नाम काटने की कोशिश, पीड़ित बोला- मैं जिंदा हूं…विधायक ने SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल

Kanker News: कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) के दौरान एक बेहद अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहां एक जीवित व्यक्ति शामिउल्ला अंसारी को सरकारी कागजों में ‘मृत’ घोषित कर उनका नाम वोटर लिस्ट से काटने के लिए फॉर्म-7 भर दिया गया। पीड़ित अंसारी ने हैरानी जताते हुए कहा कि वे वर्षों से शहर के मुख्य चौक पर ही रहते हैं और रोज लोगों के बीच मौजूद रहते हैं, इसके बावजूद उन्हें मृत बताकर नाम हटाने का आवेदन किसने और क्यों दिया, यह समझ से परे है। उनके पास सभी जरूरी दस्तावेज मौजूद हैं और वे पहले भी मतदान कर चुके हैं।

फॉर्म भरने वाले के नाम पर भी सस्पेंस

इस मामले में पेच तब और फंस गया जब आवेदन पत्र में दर्ज नाम के आधार पर संबंधित व्यक्ति से पूछताछ की गई। वार्ड क्रमांक 2 के निवासी फूल सिंह, जिनके नाम से आवेदन जमा हुआ था, उन्होंने साफ इनकार कर दिया कि उन्होंने ऐसा कोई फॉर्म भरा है। इससे यह आशंका गहरा गई है कि किसी तीसरे पक्ष ने फर्जी हस्ताक्षर या गलत जानकारी के जरिए मतदाता सूची में हेरफेर करने की कोशिश की है। इस घटना ने निर्वाचन प्रक्रिया की शुचिता और बीएलओ स्तर पर होने वाली जांच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विधायक ने लगाया बड़े षडयंत्र का आरोप

Voter List Scam: मामला सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। क्षेत्र की विधायक सावित्री मंडावी ने इसे एक बड़ी साजिश करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भानुप्रतापपुर में एक खास समुदाय के लोगों और रामपुर पुरी के करीब 40 आदिवासियों के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए सुनियोजित तरीके से फॉर्म बांटे गए हैं। विधायक ने सवाल उठाया कि जिनके पास पुश्तैनी जमीन और आधार कार्ड जैसे पक्के सबूत हैं, उन्हें निशाना क्यों बनाया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

कलेक्टर ने कहा- शरारती तत्वों पर होगी कार्रवाई

पूरे विवाद पर जिला कलेक्टर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि फॉर्म-7 के तहत प्राप्त आवेदनों की बारीकी से जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों के मुताबिक बीएलओ या ब्लॉक लेवल एजेंट एक सीमित संख्या में ही आवेदन दे सकते हैं, उससे अधिक आवेदनों को मान्यता नहीं दी जाएगी। कलेक्टर ने यह भी बताया कि जिन लोगों के नाम 2002 की पुरानी सूची में दर्ज हैं, उनके नाम कटने की संभावना न के बराबर है। प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि क्या कुछ शरारती तत्व जानबूझकर फर्जी आवेदन देकर सरकार और व्यवस्था को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।

साजिश या मानवीय भूल? जांच जारी

प्रशासनिक अमला अब इस बात की तहकीकात कर रहा है कि यह महज एक मानवीय त्रुटि है या फिर आने वाले चुनावों को प्रभावित करने की कोई गहरी प्लानिंग। फिलहाल उन सभी संदिग्ध आवेदनों की स्क्रूटनी की जा रही है जिनमें सामूहिक रूप से नाम काटने की मांग की गई है। इस घटना के बाद आम मतदाताओं के बीच भी अपने वोटिंग अधिकार को लेकर चिंता बढ़ गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि इस जालसाजी के पीछे असली चेहरा किसका है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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