
उच्च शिक्षा विभाग ने सरकारी कॉलेजों में अतिथि व्याख्याताओं की भर्ती पर लगी रोक हटा दी है। रोक हटने के बाद विभाग ने नया संशोधित आदेश जारी किया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि इस बार भर्ती प्रक्रिया में स्थानीय अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। विभाग से आदेश मिलते ही सभी शासकीय महाविद्यालयों ने अतिथि व्याख्याताओं के लिए भर्ती प्रक्रिया को दोबारा शुरू कर दिया है।
भर्ती में गड़बड़ी और बाहरी उम्मीदवारों की शिकायतों पर लगी थी रोक
इस सत्र में प्राध्यापकों के रिक्त पदों को अतिथि व्याख्याताओं के माध्यम से भरा जाना था, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी और बाहरी राज्यों के उम्मीदवारों की नियुक्ति को लेकर शिकायतें बढ़ गई थीं। इन शिकायतों के कारण ही उच्च शिक्षा विभाग ने पूरी प्रक्रिया को बीच में ही रोक दिया था, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर अस्थायी रूप से असर पड़ रहा था।
स्थानीय उम्मीदवारों का विरोध: प्राथमिकता को बनाया जाए अनिवार्य
कई कॉलेजों में दूसरे राज्यों के युवाओं को अतिथि व्याख्याता बनाए जाने पर स्थानीय उम्मीदवारों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था। उनका कहना था कि नीति 2024 की कंडिका 54 के अनुसार, छत्तीसगढ़ मूल निवासियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने मांग की थी कि प्राथमिकता के प्रावधान को ‘अनिवार्य’ बनाया जाए, ताकि बाहरी उम्मीदवारों की नियुक्ति पर रोक लग सके और स्थानीय युवाओं को मौका मिल सके।
शिकायतों की जांच के लिए बनी थी चार समितियां
उच्च शिक्षा विभाग ने भर्ती प्रक्रिया में आई शिकायतों की गहन जांच के लिए चार जांच समितियां बनाई थीं। इन समितियों ने मामले की जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंप दी है। जांच रिपोर्ट के अध्ययन के बाद ही विभाग ने भर्ती पर लगी रोक हटाने और स्थानीय प्राथमिकता के साथ प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया।
संशोधित आदेश में स्थानीय अभ्यर्थियों को मिलेगी प्राथमिकता
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी संशोधित आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि अब अतिथि व्याख्याताओं की भर्ती में स्थानीय अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इस महत्वपूर्ण बदलाव से स्थानीय उम्मीदवारों को शासकीय कॉलेजों में सेवा देने का बेहतर अवसर मिलेगा। इस कदम को स्थानीय युवाओं की मांग को देखते हुए न्यायसंगत माना जा रहा है।



