
भिलाई: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री को “बीजेपी का एजेंट” कहे जाने के बाद प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस बयान पर अयोध्या की प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने बेहद तल्ख टिप्पणी की है। भिलाई में चल रही हनुमंत कथा के मंच से उन्होंने भूपेश बघेल की तुलना रावण से कर दी। महंत ने कहा कि बघेल की भाषा और उनकी कार्यशैली पूरी तरह सनातन संस्कृति के खिलाफ है। उन्होंने आगे कहा कि केवल बड़े कुल में जन्म लेने से कोई महान नहीं होता, बल्कि व्यक्ति की पहचान उसके कर्मों से होती है। रावण भी एक ऋषि का पुत्र था, लेकिन उसके कर्म विनाशकारी थे, ठीक वैसे ही बघेल के विचार भी संस्कृति के विरुद्ध नजर आते हैं।
धर्मांतरण का धंधा बंद हुआ तो लगी मिर्ची: महंत ने लगाया मिशनरियों के समर्थन का आरोप
महंत राजू दास ने अपने संबोधन में धर्मांतरण के मुद्दे को उठाकर बघेल को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब से प्रदेश में मिशनरियों द्वारा चलाए जा रहे धर्मांतरण के खेल पर लगाम लगी है, तब से कुछ राजनेताओं को साधु-संतों और कथावाचकों में राजनीति दिखने लगी है। महंत के अनुसार, एक पूर्व मुख्यमंत्री के मुंह से ऐसी मर्यादाहीन बातें शोभा नहीं देतीं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग खुद को गांधीवादी बताते हैं, उनकी भाषा संतों के प्रति इतनी विद्वेषपूर्ण कैसे हो सकती है। महंत ने स्पष्ट किया कि सनातन का विरोध करने वाले किसी भी व्यक्ति को समाज स्वीकार नहीं करेगा।
बघेल का फिर तीखा हमला: बोले- पंडित शास्त्री को किसी विषय की समझ नहीं
दूसरी तरफ, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने रुख पर अडिग हैं और उन्होंने एक बार फिर पंडित धीरेंद्र शास्त्री पर निशाना साधा है। बिलासपुर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए बघेल ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री के पास किसी भी विषय का गहरा ज्ञान नहीं है। वे केवल विवादित बयान देकर सुर्खियों में बने रहना चाहते हैं। बघेल ने आरोप लगाया कि शास्त्री की आदत बन चुकी है कि वे जनता और मीडिया के सामने ऐसी बातें कहें जिससे समाज में भ्रम की स्थिति पैदा हो। उन्होंने पुराने वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि शास्त्री ने पहले भी आराध्य देवों पर ऐसी टिप्पणियां की हैं जो आपत्तिजनक श्रेणी में आती हैं।
ज्ञान है तो करें शास्त्रार्थ: पूर्व सीएम ने विद्वानों से भिड़ने की दी चुनौती
बघेल ने पंडित धीरेंद्र शास्त्री की विद्वता पर सवाल उठाते हुए उन्हें खुली चुनौती भी दे डाली। उन्होंने कहा कि यदि शास्त्री खुद को वास्तव में ज्ञानी समझते हैं, तो उन्हें छत्तीसगढ़ के प्रख्यात पंडितों और विद्वानों के साथ शास्त्रार्थ करना चाहिए। इससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा कि उनकी वास्तविक समझ कितनी है। बघेल के अनुसार, केवल मंच से विवादित बातें करना ज्ञान का प्रतीक नहीं है। इस जुबानी जंग ने राज्य में धर्म और राजनीति के गठजोड़ पर एक नई बहस छेड़ दी है, जिसमें अब प्रदेश के साथ-साथ अयोध्या के संतों की भी भागीदारी हो गई है।



