धान पर घमासान: भूपेश बघेल ने बेची 40 लाख की धान, बीजेपी बोली- 9 लाख से ज्यादा मिला बोनस की राशि, फिर विरोध क्यों

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। इस बार निशाने पर कोई और नहीं, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल स्वयं हैं। बीजेपी ने बघेल परिवार द्वारा बेची गई धान के आंकड़े जारी कर उन पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी का दावा है कि विष्णुदेव साय सरकार की ‘उन्नत कृषि योजना‘ के तहत बघेल और उनके परिवार को करीब 40 लाख रुपये का भुगतान हुआ है, जिसमें से 9 लाख रुपये से ज्यादा की राशि केवल बोनस (अंतर राशि) के तौर पर मिली है। बीजेपी ने सवाल उठाया है कि जब पूर्व मुख्यमंत्री स्वयं इस योजना के इतने बड़े लाभार्थी हैं, तो वे धान खरीदी की व्यवस्था पर सवाल क्यों उठाते रहे हैं?

बघेल परिवार के खाते में आए 40 लाख रुपये

बीजेपी द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, भूपेश बघेल और उनके परिजनों ने कुल 1268 क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर बेची है। इसमें अकेले भूपेश बघेल ने 925 क्विंटल धान बेची, जिसके बदले उन्हें 22 लाख रुपये की मूल राशि और करीब 6.76 लाख रुपये का बोनस मिला। इसी तरह उनके बेटे चैतन्य बघेल, बहू दीप्ति और परिवार की अन्य सदस्य मुक्तेश्वरी बघेल के खातों में भी लाखों रुपये ट्रांसफर हुए हैं। बीजेपी का कहना है कि बघेल को अपनी सरकार के समय जो ‘न्याय’ किस्तों में और ढोल पीटकर मिलता था, वह बीजेपी राज में बिना किसी भेदभाव के एकमुश्त मिल गया।

बीजेपी का तंज: अपनी सरकार से ज्यादा बीजेपी राज में मिला फायदा

मुख्यमंत्री के सलाहकार पंकज झा ने इस पूरे मामले पर तंज कसते हुए कहा कि सुशासन इसी को कहते हैं जहां विरोधी और समर्थक का भेद नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि आश्चर्य की बात है कि बीजेपी सरकार की योजना के सबसे बड़े लाभार्थियों की सूची में शीर्ष पर भूपेश बघेल का नाम है। झा के मुताबिक, बघेल जी को स्वयं भी अपनी सरकार के मुकाबले बीजेपी शासन में अधिक ‘न्याय’ मिल पाया है। होली से ठीक पहले इतनी बड़ी करमुक्त राशि मिलने पर उन्हें सरकार का आभार मानना चाहिए, न कि बेवजह की कमियां निकालनी चाहिए।

भूपेश का पलटवार: ‘हां जी, हुए मालामाल, किसान हैं तो माल उगाया’

बीजेपी के आरोपों पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, “हां जी, हुए मालामाल! किसान हैं तो माल उगाया और बेचा तो माल आया।” बघेल ने आगे कहा कि विष्णुदेव सरकार ने खाद और पर्याप्त बिजली नहीं दी, फिर भी उन्होंने पसीना बहाकर फसल उगाई। उन्होंने बीजेपी को घेरत हुए कहा कि यह पैसा उनकी मेहनत का है, किसी “पनामा” या “तावड़े” का माल नहीं। बघेल ने आरोप लगाया कि बीजेपी को किसानों के हक के पैसे से जलन हो रही है, जबकि उनकी सरकार ने हमेशा किसानों को सम्मान दिया है।

कांग्रेस बोली- धान खरीदकर कोई अहसान नहीं किया

कांग्रेस के प्रदेश संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने बीजेपी के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि भूपेश बघेल एक बड़े किसान हैं और उनकी मेहनत की उपज खरीदकर सरकार ने उन पर कोई अहसान नहीं किया है। शुक्ला ने सवाल उठाया कि बीजेपी नेता उन लाखों किसानों के बारे में बात क्यों नहीं करते जो टोकन होने के बावजूद अपनी धान नहीं बेच पाए और जिनका नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस व्यवस्था में व्याप्त कमियों का विरोध करती रही है और करती रहेगी, चाहे लाभार्थी कोई भी हो।

10 हजार करोड़ का हुआ एकमुश्त भुगतान

दरअसल, यह पूरा विवाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा बिलासपुर में आयोजित कार्यक्रम के बाद शुरू हुआ। इस कार्यक्रम में राज्य के करीब 24.28 लाख किसानों के खातों में 10,324 करोड़ रुपये की अंतर राशि एकमुश्त ट्रांसफर की गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी गई है ताकि उन्हें आने वाले खरीफ और रबी सीजन की तैयारियों में आर्थिक मदद मिल सके। बीजेपी इसी भुगतान के आंकड़ों को आधार बनाकर अब कांग्रेस के बड़े नेताओं को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है।

खेती की लागत और पसीने की कमाई पर छिड़ी जंग

सियासी दांव-पेंच के बीच अब चर्चा इस बात की है कि क्या किसी नेता का किसान होना और सरकारी लाभ लेना गलत है? जहां बीजेपी इसे ‘भेदभाव रहित शासन’ की मिसाल बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे ‘किसान का अधिकार’ करार दे रही है। भूपेश बघेल ने साफ किया कि बीजेपी सरकार को किसानों को मिल रहे पैसे को “माल” नहीं कहना चाहिए, क्योंकि यह उनके पसीने की कमाई है। फिलहाल, होली के त्योहार के बीच छत्तीसगढ़ की राजनीति में धान का यह बोनस और उस पर शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप का दौर चर्चा का मुख्य केंद्र बना हुआ है।

चुनावी साल में और तेज होगी धान पर सियासत

छत्तीसगढ़ की राजनीति हमेशा से धान और किसान के इर्द-गिर्द घूमती रही है। बीजेपी का यह ताजा हमला आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर किसानों के बीच कांग्रेस की साख को चुनौती देने की कोशिश माना जा रहा है। बीजेपी यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि उनकी योजनाएं कांग्रेस के दिग्गजों को भी पसंद आ रही हैं और वे खुद इसके लाभार्थी हैं। दूसरी तरफ, कांग्रेस किसानों की अधूरी धान खरीदी और टोकन की समस्याओं को उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश में जुटी है। आने वाले दिनों में यह जुबानी जंग और तीखी होने के आसार हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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