
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सेक्स सीडी कांड में नया मोड़ आ गया है। रायपुर सेशन कोर्ट ने सीबीआई की निचली अदालत के उस फैसले को रद्द कर दिया है जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को आरोपमुक्त किया गया था। कोर्ट ने जांच एजेंसी सीबीआई की रिव्यू पिटीशन को स्वीकार करते हुए आदेश दिया है कि अब इस मामले में भूपेश बघेल और अन्य सभी आरोपियों के खिलाफ फिर से मुकदमा चलेगा। अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री को नियमित तौर पर कोर्ट में पेश होने के निर्देश भी जारी किए हैं।
कैलाश मुरारका और विनोद वर्मा की याचिकाएं खारिज
इस मामले में भूपेश बघेल के अलावा कारोबारी कैलाश मुरारका, पूर्व सलाहकार विनोद वर्मा, विजय भाटिया और विजय पांडेय भी नामजद हैं। कैलाश मुरारका और विनोद वर्मा ने खुद को केस से अलग करने के लिए कोर्ट में आवेदन लगाया था लेकिन सेशन कोर्ट ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि आरोपियों के खिलाफ केस चलाने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं और उन्हें ट्रायल का सामना करना ही होगा। इससे आरोपियों को मिलने वाली फौरी राहत अब खत्म हो गई है।
2017 में अश्लील सीडी और ब्लैकमेलिंग से शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत अक्टूबर 2017 में हुई थी जब छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक कथित सेक्स सीडी ने भूचाल ला दिया था। भाजपा नेता प्रकाश बजाज ने रायपुर के पंडरी थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी जिसमें उन्होंने ब्लैकमेलिंग और अश्लील वीडियो के नाम पर पैसे मांगने का आरोप लगाया था। जांच के दौरान पुलिस के तार दिल्ली की एक दुकान से जुड़े और वहां से विनोद वर्मा समेत अन्य लोगों के नाम सामने आए। इसी केस की जांच के दौरान एक आरोपी रिंकू खनूजा ने सुसाइड भी कर लिया था।
2018 के चुनाव में गेमचेंजर बना था यह स्कैंडल
यह मामला केवल कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक तौर पर भी बेहद अहम रहा है। सितंबर 2018 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भूपेश बघेल और विनोद वर्मा की गिरफ्तारी हुई थी। उस वक्त भूपेश बघेल ने जमानत लेने से मना कर दिया था और जेल चले गए थे। इसके विरोध में कांग्रेस ने प्रदेश भर में “मैं भी भूपेश हूं” अभियान चलाया था। जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरा और पार्टी ने 2018 के चुनाव में 68 सीटें जीतकर भारी बहुमत से सत्ता हासिल की थी।
कानूनी और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज
सेशन कोर्ट के इस ताजा फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। अब जब नियमित ट्रायल शुरू होगा तो गवाहों के बयान और सीबीआई द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों पर सबकी नजर रहेगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भूपेश बघेल की भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों पर भी असर डाल सकता है। फिलहाल सीबीआई ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है और जल्द ही कोर्ट में गवाहों की पेशी शुरू होने की उम्मीद है।



