धान घोटाला: कागजों में उगाई गई फसल, धान खरीदी में बड़ा फर्जीवाड़ा, बिना फसल के ही कटवा लिए 15 हजार टोकन

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में धान खरीदी को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। यहां खेतों में नहीं, बल्कि सरकारी कागजों में धान की खेती कर दी गई। तालाब, सरकारी जमीन और वर्षों से खाली पड़ी भूमि को खेत दिखाकर समर्थन मूल्य पर धान बेचने की तैयारी हो गई थी। जांच नहीं होती तो सरकारी खजाने से करीब 400 से 500 करोड़ रुपये का भुगतान हो जाता।

तालाब और सरकारी जमीन को बताया गया खेत

प्रशासन की जांच में सामने आया कि जिले में 200 से ज्यादा तालाबों, सरकारी जमीन और पड़त भूमि पर धान की फसल दर्ज कर दी गई थी। कागजों में इन जगहों पर पैदावार दिखाई गई, जबकि मौके पर कहीं भी धान नहीं था। भौतिक सत्यापन में यह पूरा फर्जीवाड़ा सामने आया।

जांच शुरू होते ही रकबा समर्पण की होड़

जैसे ही प्रशासन ने सख्ती शुरू की, 52 हजार से अधिक किसानों ने 15 हजार 207 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन खुद ही समर्पित कर दी। इससे साफ हो गया कि यह मामला केवल कुछ गलत पंजीयन का नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहे एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा था।

244 करोड़ से ज्यादा का संभावित नुकसान

रिकॉर्ड के मुताबिक 15 हजार 207 हेक्टेयर में औसतन प्रति हेक्टेयर 21 क्विंटल धान की पैदावार दिखाई गई थी। अगर यह धान खरीदा जाता तो सरकार को 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करीब 244 करोड़ 52 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ता। गाइडलाइन के अनुसार यह आंकड़ा 500 करोड़ तक पहुंच सकता था।

बिना बोए धान उगाने का दावा

जांच में कई हैरान करने वाले मामले सामने आए। एक रसूखदार परिवार की 400 एकड़ जमीन की जांच में पता चला कि करीब 150 एकड़ में धान बोया ही नहीं गया था, फिर भी समर्थन मूल्य पर बिक्री की पूरी तैयारी थी। इसी तरह लीज पर ली गई वर्षों से खाली जमीन पर भी धान की पैदावार दर्ज कर दी गई।

तालाब, औद्योगिक जमीन और बाहरी धान की एंट्री

कई किसानों ने मछली पालन और औद्योगिक उपयोग वाली जमीन पर धान की खेती दिखाई। खुलासा होने पर ऐसे किसानों ने रकबा वापस किया। वहीं महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से सस्ता धान लाकर छत्तीसगढ़ के किसानों के नाम पर समर्थन मूल्य में बेचने के मामले भी पकड़े गए। प्रशासन ने 350 से ज्यादा ऐसे टोकन चिन्हित किए हैं।

राइस मिलर, अफसर और बिचौलियों की मिलीभगत

सूत्रों के मुताबिक इस घोटाले में राइस मिलर, कुछ अधिकारी और बिचौलिये शामिल थे। समितियों से धान उठाया गया, ट्रक मिल तक पहुंचे, लेकिन धान उतारा नहीं गया। वही धान दूसरे किसानों के नाम पर दोबारा बेचा गया। अनुमान है कि जिले में 20 से 30 फीसदी धान इसी तरीके से बार-बार बेचा गया।

बिना फसल के कटवा लिए गए हजारों टोकन

जिले में टोकन घोटाला भी सामने आया है। बिना खेत में धान बोए ही करीब 15 हजार क्विंटल धान बेचने के लिए हजारों टोकन कटवा लिए गए। अब धान के बाद टोकन का भौतिक सत्यापन प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

जांच तेज, सीमाओं पर निगरानी और सिस्टम पर सवाल

मामले के बाद जिला प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। खेतों और टोकन का भौतिक सत्यापन चल रहा है। दूसरे राज्यों से आने वाले अवैध धान को रोकने के लिए सीमावर्ती इलाकों में चौबीस घंटे निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि राजनांदगांव में सामने आया यह घोटाला पूरे सिस्टम की गंभीर खामी को दिखाता है और समय पर कार्रवाई नहीं होती तो सरकारी खजाने को भारी नुकसान तय था।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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