
Balod News: सरकार नियमों को ताक पर रखकर काम करना अब जैसे एक रिवाज बन गया है। छत्तीसगढ़ में भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के जंबूरी आयोजन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जेम पोर्टल (GeM) के जरिए टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही आयोजन स्थल पर काम शुरू होने की खबर ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। करीब 5 करोड़ रुपये के इस पूरे प्रोजेक्ट में पारदर्शिता की कमी साफ नजर आ रही है। बालोद के मालीघोरी मैदान में टेंट और अस्थाई निर्माण का काम हफ्तों पहले से जारी है जबकि कागजों पर टेंडर की प्रक्रिया अभी हाल ही में पूरी हुई दिखाई गई है।

कागजों पर टेंडर का ड्रामा और मैदान में हफ्ते भर पहले ही गड़ गए टेंट
टेंडर प्रक्रिया की हकीकत यह है कि जब विभाग ने 10 दिसंबर को जेम पोर्टल पर प्रस्ताव डाला तब तक मैदान में काम की नींव रखी जा चुकी थी। कायदे से 20 दिसंबर को टेंडर की क्लोजिंग होनी थी और उसी शाम इसे फाइनल किया जाना था। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि टेंडर फाइनल होने से एक सप्ताह पहले ही मालीघोरी मैदान में बड़े-बड़े पंडाल खड़े कर दिए गए थे। वहां निर्माण सामग्री का अंबार लगा हुआ है और आधे से ज्यादा काम खत्म भी हो चुका है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि जब विभाग ने आधिकारिक तौर पर किसी कंपनी को चुना ही नहीं था तो वहां काम कौन कर रहा था और किस आदेश पर कर रहा था।

अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी और टेंडर की शर्तें भी संदेह के घेरे में
जाँच के दौरान यह भी सामने आया है कि टेंडर की शर्तों को कुछ इस तरह बुना गया था कि केवल खास कंपनियां ही इसमें हिस्सा ले सकें। आमतौर पर तकनीकी बिड में 51 अंक हासिल करने वाली कंपनियां पात्र मानी जाती हैं लेकिन इस बार इसे बढ़ाकर सीधे 90 अंक कर दिया गया। इसके अलावा अनुभव के तौर पर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की अनिवार्य शर्त जोड़ दी गई जबकि इस जंबूरी में उनका आना पहले से तय ही नहीं था। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी शर्तें जानबूझकर प्रतिस्पर्धियों को बाहर करने और मनपसंद ठेकेदार को काम सौंपने के लिए बनाई जाती हैं।

संपर्क नंबर बंद और दफ्तर में ताला, पारदर्शिता की उड़ीं धज्जियां
पारदर्शी का दावा करने वाले पोर्टल की असलियत यह रही कि टेंडर क्लोजिंग के दिन विभाग का कार्यालय समय से पहले ही बंद मिला। जिन मोबाइल नंबरों को पूछताछ के लिए सार्वजनिक किया गया था वे भी बंद पाए गए। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इस जंबूरी के लिए भूमि पूजन तो धूमधाम से किया था लेकिन जब इस कथित घोटाले को लेकर उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। 9 से 14 जनवरी 2026 तक होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन की गरिमा पर अब भ्रष्टाचार के इन आरोपों ने काले बादल मंडरा दिए हैं।
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जंबूरी की भव्यता और 12 हजार प्रतिभागियों के भविष्य पर मंडराते सवाल
बालोद जिले के बुधली में होने वाला यह आयोजन संगठन की 75वीं वर्षगांठ का प्रतीक है जिसमें देश-विदेश से हजारों युवाओं के शामिल होने की उम्मीद है। शासन इस जगह को एक अस्थायी शहर में तब्दील कर रहा है जिसमें बिजली, पानी, संचार और स्वास्थ्य की हाईटेक सुविधाएं होंगी। लेकिन शुरुआती स्तर पर ही टेंडर में हुई इस धांधली ने पूरे प्रोजेक्ट की गुणवत्ता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या विभाग अपनी गलती सुधारेगा या जेम पोर्टल के नाम पर यह खेल इसी तरह चलता रहेगा, इसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।



