
रायपुर: CG Teacher YuktiYuktikaran: छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था को ज्यादा मजबूत, ज्यादा समझदार और ज्यादा छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर शालाओं और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
अब सवाल ये है—युक्तियुक्तकरण क्या बला है? सीधी बात है—जहां छात्र हैं, वहीं शिक्षक भी हों।
जहां स्कूल में एक भी बच्चा नहीं, वहां शिक्षक क्यों बैठा है?
211 स्कूल है… छात्र जीरो और शिक्षक ऑन ड्यूटी!
CG Teacher Rationalization: शिक्षा विभाग की हालिया रिपोर्ट ने चौंका देने वाले आंकड़े सामने रखे। राज्य के 211 सरकारी स्कूलों में एक भी छात्र दर्ज नहीं है, लेकिन वहां शिक्षक बाकायदा पदस्थ हैं।
मतलब—खाली क्लासरूम, खाली बेंच और टीचर पूरे समय ड्यूटी पर!
उदाहरण के लिए:
👉 बतौली (सरगुजा) के प्राथमिक स्कूल साजाभवना में एक भी बच्चा नहीं, लेकिन शिक्षक हैं।
👉 हर्राटिकरा स्कूल में छात्र शून्य, फिर भी एक प्रधानपाठक और दो सहायक शिक्षक तैनात हैं।
दूसरी तरफ आदिवासी इलाके कर रहे हैं शिक्षक का इंतजार
जहां एक तरफ छात्रविहीन स्कूलों में शिक्षक आराम से बैठे हैं, वहीं दूसरी ओर कई दूरस्थ और आदिवासी इलाकों में शिक्षक सालों से नहीं पहुंचे।
कुंवारपुर (मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) के सरकारी स्कूल में तो गणित, विज्ञान और अंग्रेज़ी के शिक्षक ही नहीं हैं। 2024-25 में यहां 12वीं का रिजल्ट सिर्फ 40.68% रहा। ग्रामीणों ने खुद मुख्यमंत्री से मिलकर शिकायती चिट्ठा दी।

मुख्यमंत्री का दो टूक आदेश: शिक्षक वहीं तैनात हों, जहां बच्चे पढ़ते हों
CM साय ने समीक्षा बैठक में साफ-साफ कहा—
“शिक्षा का मतलब है शिक्षक और छात्र का एक साथ होना।”
उन्होंने शिक्षा विभाग को आदेश दिए कि जहां शिक्षक ‘अनउपयोगी’ हैं, उन्हें तुरंत जरूरत वाले स्कूलों में भेजा जाए।
उन्होंने इसे सुशासन की पहली शर्त बताया और कहा कि ये सिर्फ एक व्यवस्था का फेरबदल नहीं, बल्कि शिक्षा की नई नींव रखने का काम है।
सुधार नहीं, क्रांति है ये: शिक्षा का रीसेट बटन दब चुका है
शिक्षाविदों की मानें तो ये फैसला समय की मांग है। अगर इसे डेटा-आधारित और निष्पक्ष तरीके से लागू किया गया, तो छत्तीसगढ़ की शिक्षा प्रणाली देश के लिए एक मॉडल बन सकती है।
शिक्षा विभाग ने युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को शुरू कर दिया है। इसमें पारदर्शिता, मानवीय सोच और स्कूलों की ज़रूरत को प्राथमिकता दी जा रही है।
अब होगा ये कि—
👉 जिन स्कूलों में बच्चे हैं, उन्हें शिक्षक मिलेंगे
👉 और जहां छात्र नहीं, वहां शिक्षक नहीं बैठेंगे
शिक्षा का मतलब सिर्फ इमारत नहीं, शिक्षक और छात्र का साथ है
मुख्यमंत्री साय ने कहा—
“हम ऐसी व्यवस्था बना रहे हैं जहां शिक्षक और छात्र दोनों अपनी सही जगह पर हों।”
युक्तियुक्तकरण सिर्फ प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के बच्चों के भविष्य की नींव को सुदृढ़ करने का बीज है।
ये वही सोच है जो कहती है—
“हर पाठशाला अगली पीढ़ी का निर्माण स्थल है।”



