
Bilaspur News Today: छत्तीसगढ़ में अवैध रेत खनन में लगे लोगों के खिलाफ न्यायपालिका ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश में संभवतः यह पहला मामला है जब अवैध रूप से रेत का परिवहन करने वालों को अदालत ने सीधे जेल की सजा सुनाई है। खान एवं खनिज अधिनियम के विशेष न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरैशी की अदालत ने इस मामले में आरोपी ट्रैक्टर मालिक और उसके चालक दोनों को दोषी ठहराते हुए 1-1 वर्ष के कठोर कारावास का आदेश जारी किया है। इसके साथ ही दोनों अभियुक्तों पर 26-26 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है।
बिना परमिट नदी से रेत निकालना केवल उल्लंघन नहीं बल्कि चोरी
Court Decision on Illegal Mining: विशेष अदालत ने अपने फैसले में पर्यावरण और नदियों के संरक्षण को लेकर गंभीर टिप्पणियां कीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना रॉयल्टी भुगतान और बिना वैध अनुमति के नदी से बालू निकालना केवल प्रशासनिक नियमों की अनदेखी नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर चोरी का अपराध है। अदालत ने कहा कि बेधड़क उत्खनन से नदियों का प्राकृतिक ढांचा पूरी तरह नष्ट होता है, जल प्रवाह का मार्ग बाधित होता है, तटबंधों का कटाव तेजी से होता है और समग्र पर्यावरण का संतुलन बिगड़ता है।
खैरा डगनिया नदी तट पर छापा मारकर पकड़ा गया था ट्रैक्टर
Court Decision on Illegal Mining: यह मामला बिलासपुर जिले के ग्राम खैरा डगनिया के पास स्थित नदी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। 16 अक्टूबर 2025 की सुबह लगभग 8:40 बजे खनिज विभाग के दल ने गुप्त सूचना के आधार पर मौके पर अचानक दबिश दी थी। कार्रवाई के दौरान दल ने बालू से लदे एक ट्रैक्टर को पकड़ा। वाहन चालक अमर कुमार केंवट से जब परिवहन पास और रॉयल्टी रसीद मांगी गई तो वह कोई भी दस्तावेज पेश नहीं कर सका। जांच के बाद सामने आया कि ट्रैक्टर मालिक जलेश्वर कश्यप है और वाहन की ट्रॉली में करीब 3 घन मीटर रेत लोड थी।
ट्रैक्टर लौटाने का आदेश परंतु जब्त रेत होगी राजसात
अदालत ने अपने आदेश में वाहन और उसमें लदे खनिज के संबंध में भी स्थिति साफ कर दी है। कोर्ट के निर्णय के अनुसार यदि निर्धारित समयावधि के भीतर उच्च न्यायालय में कोई अपील दायर नहीं की जाती है, तो जब्त ट्रैक्टर को उसके पंजीकृत स्वामी जलेश्वर कश्यप को लौटा दिया जाएगा। हालांकि, ट्रॉली में भरी हुई अवैध रेत को पूर्ण रूप से राज्य सरकार के पक्ष में राजसात किया जाएगा और उसकी बिक्री से प्राप्त राशि को सरकारी खजाने में जमा कराया जाएगा। अपील होने की स्थिति में निर्णय अपीलीय अदालत के निर्देशानुसार होगा।
बिलासपुर जिले के वैध घाट बंद फिर भी चल रहा अवैध कारोबार
Sand Theft Jail Sentence: बिलासपुर क्षेत्र में खनिज विभाग द्वारा केवल अमलडीहा, उदईबंद, सोढ़ाखुर्द और करहीकछार को ही वैध रेत घाट के रूप में चिन्हित किया गया है। निर्धारित नियमों के तहत मानसून और संबंधित अवधि के कारण फिलहाल इन सभी वैध घाटों पर उत्खनन का कार्य बंद रखा गया है। इसके बावजूद जिले के करीब 15 से 20 स्थानों पर बिना किसी अनुमति के रेत का अवैध खनन बदस्तूर जारी है। भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध के बावजूद मंगला, मोपका, सरकंडा और बिरकोना जैसे क्षेत्रों से दिन-रात रेत से लदे वाहन गुजर रहे हैं।
प्रदेश भर की नदियों में जारी है अवैध बालू का उत्खनन
अवैध रेत खनन की यह समस्या केवल किसी एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की नदियों में इस प्रकार का कारोबार चल रहा है। एनजीटी और स्थानीय प्रशासन के प्रतिबंधों के बाद भी खनन में संलिप्त लोग नदियों के किनारों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। खनिज विभाग द्वारा समय-समय पर जब्ती की खानापूरी की जाती है, लेकिन कड़े दंड के अभाव में इस अवैध गतिविधि पर पूर्ण विराम नहीं लग पा रहा था। ऐसे में यह अदालती आदेश प्रशासनिक तंत्र के लिए भी एक चेतावनी की तरह देखा जा रहा है।
अदालती कार्रवाई से अवैध उत्खनन से जुड़े लोगों में हड़कंप
विशेष न्यायालय के इस फैसले को पर्यावरणविदों और आम नागरिकों ने एक नजीर माना है। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि अब तक ऐसे मामलों में केवल जुर्माना भरकर वाहन छुड़ा लिया जाता था, जिससे अवैध उत्खनन करने वालों के हौसले बुलंद थे। अब कठोर कारावास की सजा का प्रावधान लागू होने से बालू का अवैध धंधा करने वालों और निगरानी में लापरवाही बरतने वाले प्रशासनिक अधिकारियों दोनों के लिए कड़ा संदेश गया है। इससे नदियों के संरक्षण और अवैध खनन पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
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