VIDEO: बिलासपुर रेल हादसा में इस व्यक्ति के ऊपर जुर्म दर्ज, रेलवे के 19 ‘अफसर’ तलब, CRS कर रहे जाँच

बिलासपुर 6 नवंबर 2025: Bilaspur Tain Accident: बिलासपुर के लाल खदान स्टेशन के पास मेमू ट्रेन और मालगाड़ी की भीषण टक्कर की जाँच अब कई स्तरों पर शुरू हो चुकी है। इस हादसे में 11 लोगों की मौत और 20 यात्रियों के घायल होने के बाद, रेलवे ने जाँच की कमान रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) बृजेश कुमार मिश्रा को सौंप दी है। जाँच में एक चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब पुलिस ने मृत मेमू चालक विद्या सागर के खिलाफ भी आपराधिक मामला दर्ज कर लिया। दूसरी ओर, सीआरएस ने जाँच के लिए रेलवे के 19 उच्च अधिकारियों और कर्मचारियों को तलब किया है।

बड़ा फैसला: मृत चालक पर लापरवाही का जुर्म दर्ज

रेलवे की प्रारंभिक जाँच में यह बात सामने आई है कि मेमू ट्रेन को गलत सिग्नल वाली लाइन पर चलाया गया था। इसी बड़ी लापरवाही को आधार बनाते हुए, तोरवा थाना पुलिस ने स्टेशन अधीक्षक निखलेश विठालकर की रिपोर्ट पर मृत चालक विद्या सागर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। यह फैसला चौंकाने वाला है, क्योंकि जिस पर दुर्घटना का मुख्य दोष तय किया गया, वह अब दुनिया में नहीं है।

पुलिस ने यह केस बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की धारा 106ए, 125 और रेलवे एक्ट की धारा 153, 154, 175 के तहत दर्ज किया है। इस कदम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पूरी जिम्मेदारी अकेले मृत पायलट की थी, या सिग्नलिंग सिस्टम और अन्य स्टाफ की भूमिका पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है।

देखिये वीडियो-

19 अधिकारी-कर्मचारी तलब: रेड सिग्नल क्यों पार हुआ?

रेलवे सुरक्षा आयुक्त बृजेश कुमार मिश्रा ने बुधवार से बिलासपुर डीआरएम कार्यालय में जाँच शुरू कर दी है। इस हाई-प्रोफाइल जाँच में 19 रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक दस्तावेजों के साथ तलब किया गया है। इन अधिकारियों में सहायक लोको पायलट रश्मि राज, मालगाड़ी के गार्ड सुनील कुमार साहू, मेमू ट्रेन मैनेजर ए.के. दीक्षित, और लाल खदान व गतौरा स्टेशन की स्टेशन मास्टर आशा रानी और ज्योत्स्ना रात्रे जैसे नाम शामिल हैं।

जाँच टीम का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि मेमू ट्रेन ने रेड सिग्नल क्यों पार किया। जाँच टीम सिस्टम फेल्योर, मानवीय गलती या संचालनिक लापरवाही में से किसकी गलती थी, इसकी तलाश में जुटी है। इसके लिए सिग्नल डेटा रिकॉर्डर और कंट्रोल पैनल लॉग को जब्त कर लिया गया है। रेलवे बोर्ड ने तीन दिन के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट मांगी है।

मुआवज़ा वितरण और भविष्य की सुरक्षा पर फोकस

एक ओर जहाँ जाँच का दायरा बढ़ रहा है, वहीं रेलवे प्रशासन ने मृतकों और घायलों के लिए मुआवजे की घोषणा कर दी है:

  • मृतकों के परिवारों को: ₹10-10 लाख रुपये
  • गंभीर घायलों को: ₹5 लाख रुपये
  • सामान्य घायलों को: ₹1 लाख रुपये

रेल मंत्रालय ने साफ कहा है कि इस जाँच को “सर्वोच्च प्राथमिकता” दी गई है ताकि भविष्य में ऐसी भयावह घटनाओं को रोका जा सके। दुर्घटना से सबक लेते हुए, रेलवे ने पूरे ज़ोन में सुरक्षा समीक्षा और सिग्नलिंग सिस्टम की ऑडिट प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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