
बिलासपुर: Bilaspur Train Accident: छत्तीसगढ़ में समय सनसनी मच गई जब खबर आया की बिलासपुर में एक ही पटरी में दो ट्रेनें टकरा गई और भीषण रेल हादसा हो गया आज हादसे के एक सप्ताह बाद हादसे में गंभीर रूप से घायल हुई डीपी विप्र कॉलेज की बीएससी गणित की छात्रा महविश परवीन (18) आखिरकार जिंदगी की जंग हार गई। बीते एक सप्ताह से महविश का इलाज अपोलो अस्पताल में चल रहा था, लेकिन मंगलवार देर रात उसने दम तोड़ दिया। महविश कॉलेज की एक मेधावी छात्रा बताई जाती थी। इस दुखद मौत के बाद, 4 नवंबर को हुए इस भीषण हादसे में जान गँवाने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है।

शादी से लौटते समय मेमू ट्रेन हुई थी दुर्घटनाग्रस्त
मिली जानकारी के अनुसार, महविश परवीन अपने चचेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए जांजगीर गई हुई थी। 4 नवंबर को वह कोरबा-बिलासपुर मेमू ट्रेन से वापस लौट रही थी। लालखदान के पास मेमू ट्रेन की महिला कोच मालगाड़ी से टकरा गई थी। इस भीषण टक्कर में महविश के दोनों पैर लोहे के एंगल के नीचे बुरी तरह दब गए थे। हादसे में उसके पैरों की हड्डियाँ चकनाचूर हो गईं, वहीं कॉलर बोन और पसलियों में भी गंभीर फ्रैक्चर आए थे।

सिम्स से अपोलो अस्पताल किया गया था रेफर
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और रेलवे कर्मचारियों की मदद से महविश सहित सभी घायलों को सिम्स अस्पताल पहुँचाया गया था। सिम्स में डॉक्टरों ने महविश की हालत बेहद गंभीर बताई और उसे तत्काल अपोलो अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। पिछले एक हफ्ते से डॉक्टरों की टीम लगातार उसे बचाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन गंभीर चोटों के कारण आखिरकार उसने मंगलवार देर रात दम तोड़ दिया।
लोको पायलट ने नहीं पास किया था साइकोलॉजिकल टेस्ट
रेलवे द्वारा की गई शुरुआती जाँच में एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। खुलासा हुआ है कि मेमू ट्रेन के मृत लोको पायलट विद्यासागर ने रेलवे का अनिवार्य साइकोलॉजिकल टेस्ट पास नहीं किया था। यह टेस्ट लोको पायलट की मानसिक योग्यता और आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को मापने के लिए होता है। टेस्ट पास न होने के बावजूद उन्हें पैसेंजर ट्रेन चलाने की ड्यूटी दी गई थी, जिसे बड़ी चूक माना जा रहा है।

रेलवे ने नए लोको पायलट्स के लिए ट्रेनिंग की अनिवार्य
इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए भारतीय रेलवे ने अब सख्त कदम उठाए हैं। रेलवे ने निर्देश जारी किए हैं कि नए लोको पायलट्स को पैसेंजर ट्रेन चलाने से पहले विशेष लर्निंग ट्रेनिंग अनिवार्य करनी होगी। इस ट्रेनिंग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी लोको पायलट्स मानसिक रूप से फिट हों और आपातकाल में सही निर्णय लेने में सक्षम हों, ताकि भविष्य में इस तरह के बड़े हादसे टाले जा सकें।



