छत्तीसगढ़ी संस्कृति का अपमान! पोला तिहार की शुभकामनाओं में बीजेपी नेता ने लिखा आपत्तिजनक शब्द, सोशल मीडिया में मचा बवाल

Ramvichar Netam Post: छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े पोला तिहार को लेकर एक फेसबुक पोस्ट ने विवाद खड़ा कर दिया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता रामविचार नेताम द्वारा सोशल मीडिया पर दी गई शुभकामनाओं में प्रयुक्त एक वाक्य ने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि आम जनता में भी नाराजगी पैदा कर दी है।

भाजपा नेता की पोस्ट पर उठे सवाल

Chhattisgarh BJP controversy: रायपुर के रावणभाठा मैदान में आयोजित पोला तिहार कार्यक्रम में शामिल होने के बाद नेताम ने फेसबुक पर लिखा— “आप मन ला गाड़-गाड़ बधाई”। यह वाक्य छत्तीसगढ़ी बोलचाल में एक सामान्य अभिव्यक्ति हो सकती है, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों ने इसे अशोभनीय और अपमानजनक मानते हुए आपत्ति जताई है। खास तौर पर ‘गाड़-गाड़’ शब्द को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।

कांग्रेस ने जताया विरोध

BJP Leader Viral Post: विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे को तुरंत लपकते हुए भाजपा पर छत्तीसगढ़ी संस्कृति के अपमान का आरोप लगाया है। कांग्रेस प्रवक्ताओं का कहना है कि भाजपा एक तरफ छत्तीसगढ़ी अस्मिता की बात करती है, वहीं दूसरी ओर उसी संस्कृति से जुड़े पर्व पर इस तरह के अनुचित शब्दों का प्रयोग कर रही है। पार्टी ने इसे ‘दोहरी मानसिकता’ करार दिया और नेताम से सार्वजनिक माफी की मांग की है।

सोशल मीडिया पर जनता का गुस्सा

Pola Festival Politics: रामविचार नेताम की पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों का आक्रोश फूट पड़ा है। हजारों लोगों ने कमेंट कर उनकी आलोचना की है। कई यूजर्स ने लिखा कि अगर किसी आम नागरिक ने ऐसा लिखा होता, तो भाजपा के ही लोग उसका विरोध करते, लेकिन जब खुद पार्टी के वरिष्ठ नेता ऐसा कर रहे हैं, तो पार्टी चुप है।

भाषा और संस्कृति का अपमान: बुद्धिजीवियों की नाराजगी

राज्य के साहित्यकारों, संस्कृतिकर्मियों और शिक्षाविदों ने भी मामले को गंभीर बताया है। उनका कहना है कि त्योहारों पर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल न सिर्फ भाषाई मर्यादा के खिलाफ है, बल्कि यह त्योहारों की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है। उन्होंने भाजपा से स्पष्टीकरण और नेताम से माफी की मांग की है।

भाजपा की प्रतिक्रिया का इंतजार

मामला तूल पकड़ने के बावजूद अब तक भाजपा की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रदेश में यह मुद्दा स्थानीय बनाम राजनीतिक सोच की दिशा ले चुका है। अब देखना होगा कि पार्टी इस विवाद को कैसे संभालती है और क्या नेताम माफी मांगते हैं या इसे छत्तीसगढ़ी अभिव्यक्ति के रूप में सही ठहराते हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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