
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। जशपुर की बीजेपी विधायक रायमुनी भगत शुक्रवार को अपनी ही सरकार के प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठ गईं। सन्ना थाना क्षेत्र में बेशकीमती सरकारी जमीन पर हो रहे निर्माण कार्य को न रोक पाने से नाराज विधायक ने सैकड़ों ग्रामीणों और समर्थकों के साथ मोर्चा खोल दिया है। विधायक का आरोप है कि अधिकारी भू-माफियाओं के सामने नतमस्तक हैं और सरकारी संपत्ति की खुलेआम लूट हो रही है।
प्रशासनिक आदेश की धज्जियां उड़ाकर चलता रहा निर्माण
विवाद की जड़ सन्ना पेट्रोल पंप के पास स्थित एक कीमती सरकारी भूखंड है। बगीचा अनुविभाग के एसडीओ ने इस मामले में पहले ही हस्तक्षेप करते हुए अनावेदक अशोक गुप्ता को निर्माण कार्य तुरंत रोकने का लिखित आदेश दिया था। इसके बावजूद मौके पर धड़ल्ले से काम जारी रहा। विधायक का कहना है कि जब प्रशासन के आदेश का ही पालन नहीं हो रहा है, तो अधिकारियों की कुर्सी पर बैठने का कोई मतलब नहीं है। इसी अनदेखी से तंग आकर उन्होंने सड़क पर उतरने का फैसला किया।
भू-माफियाओं को संरक्षण देने का आरोप, हटने को तैयार नहीं विधायक
धरना स्थल पर मीडिया से बात करते हुए रायमुनी भगत ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन भू-माफियाओं को संरक्षण दे रहा है और सरकारी जमीन बचाने में पूरी तरह नाकाम रहा है। विधायक ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक उस जमीन पर हो रहे अवैध निर्माण को ध्वस्त नहीं किया जाता और कब्जा नहीं हटाया जाता, तब तक वे धरना खत्म नहीं करेंगी।

अशोक गुप्ता की दलील: ‘यह मेरी निजी संपत्ति है, जानबूझकर बनाया जा रहा विवाद’
दूसरी ओर इस पूरे विवाद के केंद्र में मौजूद अशोक गुप्ता ने प्रशासन और विधायक के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि जिस जमीन को सरकारी बताया जा रहा है, वह वास्तव में उनकी निजी संपत्ति है और उनके पास इसके पर्याप्त दस्तावेज मौजूद हैं। गुप्ता ने आरोप लगाया कि राजनीतिक द्वेष के चलते उन्हें परेशान किया जा रहा है और वे अपनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे। दोनों पक्षों के अड़ियल रुख ने प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
भारी पुलिस बल तैनात, तनाव को देखते हुए अधिकारी मौके पर मौजूद
विधायक के धरने की खबर मिलते ही जिले के वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए हैं। इलाके में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है जिसे देखते हुए सन्ना और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। तहसीलदार और अन्य अधिकारी विधायक को समझाने और बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन फिलहाल कोई समाधान निकलता नजर नहीं आ रहा है।
तीन महीने पुराना विवाद अब बना जिले की सबसे बड़ी राजनीतिक जंग
यह जमीन विवाद पिछले करीब तीन महीनों से सुलग रहा था लेकिन प्रशासन की सुस्ती ने इसे अब एक बड़े राजनीतिक संकट में बदल दिया है। ग्रामीणों का समर्थन और अपनी ही पार्टी की विधायक का कड़ा रुख जशपुर प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन कागजों की पड़ताल के बाद क्या सख्त कदम उठाता है या फिर यह सियासी रस्साकशी और लंबा खिंचेगी।



