
धमतरी: जिले के ग्राम अछोटा में भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा है। 400 से अधिक कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को सामूहिक इस्तीफा देकर पार्टी संगठन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। कार्यकर्ता जब जिला भाजपा कार्यालय पहुंचे तो वहां कोई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद नहीं था। नाराज़ कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा पत्र सीधे कार्यालय के दरवाज़े पर चिपकाकर लौटने का निर्णय लिया।
भ्रष्टाचार के आरोप और कार्रवाई का अभाव
ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व सरपंच के कार्यकाल में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई।
- दीनदयाल उपाध्याय योजना के नाम पर शासकीय ज़मीन बेचे जाने का आरोप।
- तालाब सौंदर्यीकरण के नाम पर लगभग 15 लाख रुपए के गबन का आरोप।
- तालाबों से मुरुम का अवैध उत्खनन और बिक्री का आरोप।
ग्रामीणों का कहना है कि इन मामलों की शिकायत प्रशासन और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से की गई। जांच में भ्रष्टाचार सही भी पाया गया, लेकिन आज तक दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

कार्यकर्ताओं की पीड़ा : “सुनवाई ही नहीं होती”
जनपद सदस्य कैलाश देवांगन, सरपंच संतोषी ढीमर, उप सरपंच तिहारु राम देवांगन, ग्राम विकास समिति अध्यक्ष खिलेश सेन, सचिव योगेश्वर देवांगन सहित कई स्थानीय नेताओं ने बताया कि
- 28 अप्रैल को जनदर्शन कार्यक्रम में चार बिंदुओं पर शिकायत दर्ज कराई थी।
- 21 जुलाई को दोबारा वही मुद्दे उठाए गए।
- शिकायतों की जांच हुई और आरोप सही पाए गए, लेकिन किसी भी स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई।
नाराज़ कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब भी वे अपनी मांग लेकर कार्यालय जाते हैं, तो कोई सुनवाई नहीं होती। इस उपेक्षा से वे खुद को अपमानित और प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं।
इस्तीफा पत्र में लिखा…
सामूहिक इस्तीफे में कार्यकर्ताओं ने लिखा—
“हम सभी गंगरेल मंडल अंतर्गत ग्राम अछोटा के भाजपा के प्राथमिक सदस्य हैं। पंचायत चुनाव के बाद हमारे आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई गई। कई बार मौखिक और लिखित शिकायत के बावजूद उच्च पदाधिकारियों ने कोई पहल नहीं की। ऐसे हालात में हम सभी भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं।”

भाजपा के लिए बड़ा झटका
अछोटा जैसे महत्वपूर्ण ग्राम में इतने बड़े पैमाने पर कार्यकर्ताओं का पार्टी छोड़ना भाजपा के लिए गंभीर सियासी झटका माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि इस असंतोष को पार्टी ने समय रहते शांत नहीं किया, तो आगामी पंचायत और विधानसभा चुनावों में इसका असर साफ दिखाई दे सकता है।
अब सबकी निगाहें पार्टी के रुख पर
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा के जिला और प्रदेश नेतृत्व इस मामले को किस तरह से संभालते हैं। क्या वे नाराज़ कार्यकर्ताओं को मनाने आगे आएंगे या फिर इस मामले को अनुशासनात्मक ढांचे के तहत कड़ा कदम उठाकर निपटाएंगे—इस पर सबकी नज़रें टिकी हुई हैं।



