Air Pollution: छत्तीसगढ़ के इस शहर की हवा में घुल रहा ‘जहर’: AQI 150 के पार पहुंचने से सांस लेना हुआ दूभर, प्रदूषण मापने की मशीनें भी सवालों के घेरे में

Air Pollution: छत्तीसगढ़ के प्रमुख औद्योगिक शहर भिलाई में प्रदूषण का स्तर अब इंसानी सेहत के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। हाल ही में शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 150 के पार दर्ज किया गया है, जो स्वास्थ्य मानकों के हिसाब से बेहद ‘हानिकारक’ श्रेणी में आता है। डॉक्टरों का कहना है कि जब हवा का स्तर 100 से ऊपर होता है, तो लंबे समय तक वहां रहने से सांस और फेफड़ों की बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। प्रदूषण का सबसे बुरा असर हथखोज औद्योगिक क्षेत्र में देखा जा रहा है, जहां इस महीने कई दिनों तक एक्यूआई ने खतरे के निशान को पार किया है।

हथखोज इलाके में प्रदूषण की स्थिति इस प्रकार रही है:

  • 07 दिसंबर: एक्यूआई 154 (सबसे खतरनाक स्तर)
  • 13 दिसंबर: एक्यूआई 108
  • 16 दिसंबर: एक्यूआई 102
  • 17 दिसंबर: एक्यूआई 104

प्रदूषण मापने के स्टेशनों की लोकेशन पर उठे सवाल: छिपाई जा रही है हकीकत?

शहर में बढ़ते प्रदूषण के बीच निगरानी तंत्र पर भी उंगलियां उठने लगी हैं। आरोप लग रहे हैं कि प्रदूषण मापने वाले स्टेशन ऐसी जगहों पर लगाए गए हैं जहां धूल और धुआं कम होता है। उदाहरण के तौर पर हथखोज में स्टेशन मुख्य चौक के बजाय शांत मार्ग पर है, वहीं सिविक सेंटर का स्टेशन चारों ओर हरियाली से घिरा हुआ है। जानकारों का मानना है कि यदि यही स्टेशन बीएसपी मेन गेट या बोरिया गेट जैसे व्यस्त और औद्योगिक इलाकों में होते, तो प्रदूषण की असली और डरावनी तस्वीर जनता के सामने आती। फिलहाल सड़कों पर धूल कम करने के लिए लाई गई एंटी-स्मॉग गन भी केवल शोपीस बनकर रह गई है और हवा लगातार जहरीली हो रही है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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