फूलो देवी नेताम पर कांग्रेस का दोबारा भरोसा: राज्यसभा चुनाव के लिए छत्तीसगढ़ से उम्मीदवार घोषित

छत्तीसगढ़ की राजनीति में राज्यसभा सीटों के लिए जारी गहमागहमी के बीच कांग्रेस ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। पार्टी हाईकमान ने वरिष्ठ आदिवासी नेत्री और निवर्तमान सांसद फूलो देवी नेताम को एक बार फिर उच्च सदन भेजने का निर्णय लिया है। रायपुर से लेकर दिल्ली तक चले लंबे मंथन के बाद, कांग्रेस ने संगठनात्मक अनुभव और महिला नेतृत्व को प्राथमिकता देते हुए उनके नाम पर मुहर लगाई है। दिलचस्प बात यह है कि भाजपा द्वारा लक्ष्मी वर्मा को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद अब छत्तीसगढ़ की दोनों राज्यसभा सीटों पर महिला उम्मीदवारों के बीच मुकाबला तय हो गया है।

कार्यकाल खत्म होने से पहले ही दोबारा मिला मौका

फूलो देवी नेताम का वर्तमान राज्यसभा कार्यकाल 2 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है। आमतौर पर कार्यकाल खत्म होने के बाद नए चेहरों को मौका दिए जाने की चर्चा रहती है, लेकिन फूलो देवी की सक्रियता और बस्तर अंचल में उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए पार्टी ने उन पर दोबारा भरोसा जताया है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि कल होने के कारण कांग्रेस नेतृत्व पर जल्द नाम तय करने का भारी दबाव था। आज औपचारिक घोषणा के साथ ही यह साफ हो गया है कि कांग्रेस अपने पुराने और विश्वसनीय चेहरों के साथ ही चुनावी मैदान में उतरेगी।

दिग्गजों को पछाड़कर बनाया अपना स्थान

राज्यसभा की इस एकल सीट के लिए कांग्रेस के भीतर कई बड़े नामों पर चर्चा चल रही थी। दावेदारों की सूची में पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज जैसे कद्दावर नेताओं के नाम प्रमुखता से शामिल थे। सूत्रों के अनुसार, पार्टी आलाकमान ने सामाजिक समीकरणों और आगामी रणनीतियों को ध्यान में रखते हुए महिला और आदिवासी कार्ड खेलना उचित समझा। टीएस सिंहदेव और दीपक बैज जैसे दिग्गजों की मौजूदगी के बावजूद फूलो देवी नेताम का चयन उनके सांगठनिक समर्पण और निर्विवाद छवि का परिणाम माना जा रहा है।

बस्तर की आवाज और महिला कांग्रेस की कमान

फूलो देवी नेताम छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक जाना-पहचाना नाम हैं। वे वर्तमान में छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही हैं। इसके अलावा, वे कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की सदस्य भी रह चुकी हैं। बस्तर क्षेत्र से आने वाली एक प्रखर आदिवासी नेता के रूप में उन्होंने सड़क से लेकर संसद तक जनजातीय मुद्दों और महिलाओं के अधिकारों के लिए पुरजोर आवाज उठाई है। साल 2020 में पहली बार राज्यसभा पहुंचने वाली नेताम ने अपने 6 साल के कार्यकाल में दिल्ली के गलियारों में छत्तीसगढ़ की प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराई है।

विधानसभा का गणित और चुनावी समीकरण

छत्तीसगढ़ विधानसभा की मौजूदा स्थिति को देखें तो भाजपा के पास 54 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत है, जबकि कांग्रेस के पास 35 सीटें हैं। संख्या बल के आधार पर रिक्त हो रही दो सीटों में से एक सीट भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाना लगभग तय है। चूँकि भाजपा ने पहले ही लक्ष्मी वर्मा को मैदान में उतार दिया है, इसलिए अब दोनों प्रमुख दलों ने महिला प्रत्याशियों के जरिए प्रदेश की ‘आधी आबादी’ को साधने की कोशिश की है। कल दोपहर 3 बजे तक नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद औपचारिक निर्वाचन की राह साफ हो जाएगी।

Also Read: छत्तीसगढ़ से लक्ष्मी वर्मा जाएंगी राज्यसभा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पसंद पर हाईकमान ने लगाई मुहर

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button